सुदर्शन फ़ाकिर-एक दर्द भरा शायर

सुदर्शन फ़ाकिर-एक दर्द भरा शायर अब जहाँ को अलविदा कह गया है |१८ फरवरी ‘०८ की रात के आग़ोश में उन्होंने हमेशा के लिए पनाह ले ली |वो सोच जो ज़िन्दग़ी, इश्क , दर्दो-ग़म को इक अलग नज़रिये से ग़ज़लों के माध्यम से पेश करती थी, वह सोच सदा के लिये सो गई |बेग़म अख़्तर की गाई हुई इनकी यह ग़ज़ल” इश्क में ग़ैरते जज़्बात ने रोने न दिया”–किस के दिल को नहीं छू गई? या फिर “यह दौलत भी ले लो, यह शौहरत भी ले लो|भले छीनलो मुझसे मेरी जवानी, मग़र मुझको लौटा दो वो बचपन का सावन वो क़ाग़ज़ की कश्ती वो बारिश का पानी” –जन-जन को इस क़लाम ने बचपन की यादों से सरोबार कर दिया |इनके काँलेज के साथी जगजीत सिह ने जब इनकी यह नज्म गाई, तो दोनों ही इससे मशहूर हो गए |सालों से सुनते आ रहे, गणतंत्र दिवस पर एन. सी. सी.के बैंड की धुन” हम सब भारतीय हैं” यह भी फ़ाक़िर की रचना है |इससे पूर्व जवानी में फ़ाकिर आल इंडिया रेडियो जलंधर पर ड्रामा एवम ग़ज़लों के साथ व्यस्त रहे |फिर जब एक बार मुम्बई की ओर रुख़ किया तो ये एच.एम वी के साथ ता उम्र के लिए जुड़ गए |बेग़म अख़्तर ने जब कहा कि अब मैं फ़ाक़िर को ही गाऊंगी,तो होनी को क्या कहें, वे इनकी सिर्फ़ पाँच ग़ज़लों को ही अपनी आवाज़ दे सकीं थीं कि वे इस जहान से चलता कर गईं |हृदय से बेहद जज़्बाती फ़ाकिर अपनी अनख़, अपने आत्म सम्मान को बनाए रखने के कारण कभी किसी से काम माँगने नहीं गए | वैसे उन्होंने फिल्म ‘दूरियाँ, प्रेम अगन और यलग़ार” के संवाद और गीत लिखे थे | ये काफ़ी लोकप्रिय भी हुए थे |हर हिन्दू की पसंद कैसेट’ हे राम’ भी फ़ाक़िर की रचना है |इसने तो इन्हें अमर कर दिया है |संयोग ही कहिए कि जिस शव-यान में इनकी शव-यात्रा हो रही थी , उसमें भी यही ‘हे राम’ की धुन बज रही थी |सादगी से जीवन बिताते हुए वे जाम का सहारा लेकर अपने दर्दो-ग़म को एक नया जामा पहनाते रहे | जलंधर आने पर जब भी हम इकठे बैठते तो वे अपने कलाम को छपवाने की चर्चा करते या फिर मेरी रचनाओं को पढ़कर मुझे गाईड करते थे | रिश्ते में सालेहार थी मैं उनकी ,सो कभी हँसी-मज़ाक भी हो जाता था | तेहत्तर वर्ष कि उम्र में भी वे मस्त थे |लेकिन दुनिया से अलग- थलग, इक ख़ामोशी से चेहरा ढ़ाँके हुए |फ़ैज़ अहमद फ़ैज़ फ़ाकिर को बहुत बड़ा शायर मानते थे | ‘द लेटेस्ट’ में जगजीतसिहं ने फ़ाकिर को गाया है, और आगे भी वे उन्हें गाएंगे—-पर उसे सुनने को ख़ुद फ़ाकिर नही होंगे |इन्हीं चदं अशआर से उन्हें श्रद्धाँजली देती हूं| उन्हें उनके चाहनेवालों का सदा के लिए सलाम !!!!

वीणा विज ‘उदित’

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3 Responses to “सुदर्शन फ़ाकिर-एक दर्द भरा शायर”

  1. Rohit Says:

    May his soul rest in peace – we will miss him…..

    in Press: http://www.tribuneindia.com/2008/20080220/punjab1.htm#10

    A rare interview: http://www.tribuneindia.com/2005/20050809/cth2.htm#7

    The eternal one sung by Jagjit Singh that won (someone even like) me a prize in poem recitation when I was 11: Woh Kagaz Ki Kashti….

  2. Chaand Shukla Says:

    Dear Veena Vij,

    Your artical on Sh Sudarshan Fakir was a touching one!

    Please send me your Phone number,
    We would like you tp join “Global Community”

    Chaand Shukla
    Denmark

  3. Ashok Jaiswal Says:

    बहुत हि शानदार पेशकश.

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