sannato ke pahredar

सन्नाटों के पहरेदार

प्रथम संस्करण १९९९
प्रस्तुत है- द्वितीय संस्करण
मन हर्षित है कि “सन्नाटों के पहरेदार” के पंद्रहवें वर्ष में पदार्पण पर इसका द्वितीय-संस्करण प्रस्तुत किया जा रहा है |१४ सितम्बर को हिंदी-दिवस के उपलक्ष्य में हिंदी-भाषा पर चार कविताएं,दो ग़ज़लें और दो अन्य कविताएं इनमें और डाल दी गई हैं |हिंदी भाषा के किरीट तरू अग़्येय के कथनानुसार यह ‘एक दौड़ती लहर के गतिचित्र’अर्थात उसी काल के किसी एक क्षण व मनःस्थिति के भाव हैं |जो आपको आकर्षित करेंगे|आशा है यह संग्रह मेरे कृतित्व का एक समग्र रूप प्रस्तुत कर सकेगा |
कृतग्यता से आनत,
वीणा विज ‘उदित’

द्वितीय संस्करण २०१४

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