चन्द अशआर…..बेबसी के नाम!

मैंने तुम्हे चाहा
तुमने मुझे चाहा
मैंने तुममें कुछ देखा
तुमने मुझमें कुछ देखा
हमने क्या चाहा, क्या देखा
हमें कब इसकी ख़बर हुई
क्या होगा…हमारा ?
ये न मैं जानता हूँ
न तुम जानते हो
शायद! ख़ुदा जानता है…

*
मुझसे
यह उम्मीद न करो
कि मैं तुमसे कहूं
मुझे तुमसे
मोहब्बत है !!
आओ हम दोनों,
अपनी-अपनी
मज़बूरी को जान लें!
और
मायूस ख़ामोशी का
दामन थामकर
ख़ामोश हो जाएं !!

*
सिर्फ़ एहसास रहे
कुछ न कहें!
महसूस करें!
हम..
अपनी दीवानगी
अपने पाग़लपन को!!
तुम्हारी
ख़ामोशियों की चीख़ें
मेरी
मुंदी आँखों की
कोर से
चश्मे बनकर फूटी हैं
हे मेरे मसीहा!
क्या
इनसे अपनी<
रूह कीbr>
प्यास बुझा पाओगे….?
वीना विज ‘उदित’

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