अवतरण

घन घना घन घन
बादलो के
नाद की गूंज
दस्तक देती
पुलकित
मानस पटल
पर नन्ही
किलकारियो की गून्ज
युग पुरुष
अवतरित हुआ
धरा का कण-कण
अंकुरित हो
पल्लवित हुआ
रोहन पर करे मान
अभिमान
हो गुणवान ………

वीणा विज ‘उदित’

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