<?xml version="1.0" encoding="UTF-8"?>
<rss version="2.0"
	xmlns:content="http://purl.org/rss/1.0/modules/content/"
	xmlns:wfw="http://wellformedweb.org/CommentAPI/"
	xmlns:dc="http://purl.org/dc/elements/1.1/"
	xmlns:atom="http://www.w3.org/2005/Atom"
	xmlns:sy="http://purl.org/rss/1.0/modules/syndication/"
	xmlns:slash="http://purl.org/rss/1.0/modules/slash/"
	>

<channel>
	<title>Hindi short stories, poetry and blogs &#187; Random</title>
	<atom:link href="http://www.veenavij.com/category/random/feed/" rel="self" type="application/rss+xml" />
	<link>http://www.veenavij.com</link>
	<description>Veena Vij Udit&#039;s writings in Hindi</description>
	<lastBuildDate>Fri, 27 Jan 2012 14:54:21 +0000</lastBuildDate>
	<language>en</language>
	<sy:updatePeriod>hourly</sy:updatePeriod>
	<sy:updateFrequency>1</sy:updateFrequency>
	<generator>http://wordpress.org/?v=3.1.1</generator>
		<item>
		<title>Films n&#8217;Radio Programmes I did</title>
		<link>http://www.veenavij.com/films-nradio-programmes-i-did/</link>
		<comments>http://www.veenavij.com/films-nradio-programmes-i-did/#comments</comments>
		<pubDate>Fri, 29 Jul 2011 08:11:48 +0000</pubDate>
		<dc:creator>Veena</dc:creator>
				<category><![CDATA[Random]]></category>

		<guid isPermaLink="false">http://www.veenavij.com/?p=389</guid>
		<description><![CDATA[कुछ फिल्मों में काम किया था &#124; दबाव था कि ,आप मुम्बई में रहें , यह संभव नहीं था, क्योंकि मेरी प्राथमिकता मेरा परिवार था &#124;खैर, ८० के दशक में शायद १९८८ में मैंने पहली फिल्म की &#124;- १&#8211;सन्-१९८८&#8211;पंजाबी फिल्म&#8211;&#8221;पुर्जा-पुर्जा कट मरे&#8221; ड़ायरेक्टर-सुरेन्दर साहनी , मेन कास्ट-गुग्गू गिल और उपासना सिंग, शूटिंग &#8211;काहलों गाँव में [...]]]></description>
			<content:encoded><![CDATA[<p>कुछ फिल्मों में काम किया था | दबाव था कि ,आप मुम्बई में रहें , यह संभव नहीं था, क्योंकि मेरी प्राथमिकता मेरा परिवार था |खैर, ८० के दशक में शायद १९८८ में मैंने पहली फिल्म की |-</p>
<p>१&#8211;सन्-१९८८&#8211;पंजाबी फिल्म&#8211;&#8221;पुर्जा-पुर्जा कट मरे&#8221;<br />
ड़ायरेक्टर-सुरेन्दर साहनी , मेन कास्ट-गुग्गू गिल और उपासना सिंग, शूटिंग &#8211;काहलों गाँव में हुई थी |</p>
<p> २&#8211;&#8221;खेड़ मुकदरां दे&#8221;&#8211;पंजाबी फिल्म<br />
कास्ट-दारा सिंग आदि , शूटिंग-कपूर्थला में हुई थी |</p>
<p>३&#8211;&#8221;वारिस&#8221;&#8211;पंजाबी फिल्म<br />
मेन कास्ट-गुग्गू गिल और सरबजीत मांगट , हीरो की माँ का रोल , शूटिंग-&#8217;गोइंदवाल साहेब में हुई थी |</p>
<p>४&#8211;&#8221;पंछी&#8221;&#8211;पंजाबी फिल्म<br />
मेहर मित्तल , यश शर्मा आदि , शूटिंग -बंगा + नवा शहर में हुई |</p>
<p>५&#8211;&#8221;असी तेरे कि लगदे&#8221;&#8211;पंजाबी फिल्म<br />
सरस्वती कला मंदिर प्राँड़क्शन्स<br />
निर्माता-बी.ड़ी शर्मा , निर्देशक-दीपक धीमाण<br />
माँ का रोल</p>
<p>६&#8211;&#8221;फूलों की चुभन&#8221;, हिन्दी फिल्म<br />
सन्धू प्राँड़क्शन्स , रोल-मास्टर जी की पत्नी (अधूरी)</p>
<p>७&#8211;&#8221;कोयल&#8221;-हिन्दी फिल्म (बौली वुड़ फिल्म)<br />
संजय शर्मा प्रोड़्यूसर , गौतम शर्मा-ड़ायरेक्टर<br />
मेन कास्ट&#8211;अरमान कोहली , देवयानी , सुरेश ओबेराँय , सईद जाफरी , राम मोहन , शम्मी , राजेन्द्रनाथ ,वीना विज , रमना वधावन  ,स्वाति विज आदि<br />
शूटिंग&#8211;चम्बा, खजियार और ड़लहौजी में हुई सन्-१९९२ में |</p>
<p>रेड़ियो-प्रोग्राम्सः-</p>
<p>१-सन्-१९९३में १९ अक्टूबर को&#8211;पंजाबी ड़्रामा , &#8220;अखियाँ&#8221;</p>
<p>२&#8211;सन्&#8211;१९९४ , में १५ मार्च को , हिंदी नैशनल ड़्रामा , &#8220;स्वप्न वासवदत्ता&#8221;</p>
<p>३&#8211;सन्&#8211;१९९४ में २४ जून को&#8211;हिन्दी नैशनल प्ले &#8221; मालिया&#8221;</p>
<p>४&#8211;सन्&#8211;१९९६ में , ४ अप्रैल को&#8211;हिन्दी प्ले , &#8220;सूरज को आने दो &#8221;</p>
<p>५&#8211;सन्&#8211;१९९७ में , २८ जून को , हिन्दी नैशनल प्ले , &#8220;ज्वालामुखी&#8221;</p>
<p>६&#8211;सन्-१९९९ में २३ फरवरी को , &#8220;काव्यधारा-प्रोग्राम &#8221; में अपनी लिखी कविताएं पढीं |</p>
<p>बाकि प्रोग्राम्स का मेरे पास रिकाँर्ड़ नहीं मिला |शायद रेड़ियो -स्टेशन से मिले |</p>
]]></content:encoded>
			<wfw:commentRss>http://www.veenavij.com/films-nradio-programmes-i-did/feed/</wfw:commentRss>
		<slash:comments>0</slash:comments>
		</item>
		<item>
		<title>List of my stage-plays:-</title>
		<link>http://www.veenavij.com/list-of-my-stage-plays/</link>
		<comments>http://www.veenavij.com/list-of-my-stage-plays/#comments</comments>
		<pubDate>Tue, 26 Jul 2011 03:53:55 +0000</pubDate>
		<dc:creator>Veena</dc:creator>
				<category><![CDATA[Random]]></category>

		<guid isPermaLink="false">http://www.veenavij.com/?p=382</guid>
		<description><![CDATA[स्कूल में नर्सरी-क्लास से ही मैं स्टेज़ पर शो करती थी &#124;अतीत धुँधला सा गया है, कुछ अधिक याद नहीं आ रहा &#124;हाँ, १&#8211;सन -१९५७ में हिन्दी नाटक , &#8220;नूरजहाँ&#8221; में नूरजहाँ के रोल के लिए मुझे बैस्ट एक्टिंग का अवार्ड़ मिला था &#124; २&#8211;सन्-१९५८-में हिन्दी नाटक , &#8220;भिक्षुणी&#8221;-के लिए फिर बैस्ट एक्टिंग का अवार्ड़ [...]]]></description>
			<content:encoded><![CDATA[<p>स्कूल में नर्सरी-क्लास से ही मैं स्टेज़ पर शो करती थी |अतीत धुँधला सा गया है, कुछ अधिक याद नहीं आ रहा |हाँ,<br />
१&#8211;सन -१९५७ में हिन्दी नाटक , &#8220;नूरजहाँ&#8221; में नूरजहाँ के रोल के लिए मुझे बैस्ट एक्टिंग का अवार्ड़ मिला था |<br />
२&#8211;सन्-१९५८-में हिन्दी नाटक , &#8220;भिक्षुणी&#8221;-के लिए फिर बैस्ट एक्टिंग का अवार्ड़ लिया |(न्यूज़-पेपरों में भी सराहा गया)<br />
३&#8211;&#8221;नव रस -प्रोग्राम&#8221; में मैं हिन्दी साहित्य के नौ -रस की एक्टिंग करती थी , जिसकी बहुत ड़िमांड़ होती थी |यह मैं काँलेज में भी करती रही |एन. सी. सी कैम्प्स में भी यह प्रोग्राम चलता रहा |<br />
  इसके बाद १९५९ में मैं जबलपुर में होम-साइंस काँलेज पढने<br />
गई |<br />
४&#8211;सन -१९६० में जयशंकर प्रसाद की काव्य-पुस्तक &#8220;कामायनी&#8221; पर नृत्य-नाटिका में अभिनय किया |<br />
५&#8211;सन -१९६१ में हिन्दी नाटक , &#8220;बुदधा &#8221; में बैस्ट एक्टिंग का अवार्ड़ लिया |<br />
६&#8211;सन १९६२ में नृत्य-नाटिका , &#8220;हाड़ा रानी&#8221; , में फिर बैस्ट एक्टिंग का अवार्ड़ लिया |<br />
७&#8211;सन्&#8211;१९६८ में हवाबाग काँलेज में एम.एड़ करते हुए &#8220;हाड़ा रानी&#8221; नृत्य-नाटिका का निर्देशन एवम एक्टिंग भी की |फिर से बैस्ट एक्टिंग का अवार्ड़ लिया |<br />
    इसके पश्चात सन्-१९७० में विवाह के बाद गृहस्थी में व्यस्त हो गई |<br />
८&#8211;सन्&#8211;१९८८ में नाटक ग्रुप &#8220;आयाम&#8221; शुरू किया |इसके अन्तर्गत बादल सरकार का हिन्दी-नाटक &#8220;भूत बंगला &#8220;खेला |<br />
९&#8211;सन्&#8211;१९९६ में मशहूर पंजाबी नाटक , &#8220;भगतसिंग दी वापसी &#8220;में भगतसिंग की माँ का यादगार रोल किया |हम<br />
शहीद भगतसिंग के गाँव में उसके घर गए और वहाँ भी शूटिंग की |पूरी टीम यू.एस का वीज़ा लेने गई , लेकिन १४ में से ८ को वीज़ा मिला और हमारे ४ शॉस जो अमेरिका में होने थे वो कैंसल किए गए |<br />
१०&#8211;सन्&#8211;१९९७ -में कमल विद्रोही का स्टेज़ प्ले , &#8220;दुल्ला भट्टी&#8221; पंजाबी में किया |&#8221;लद्दी&#8221; दुल्ले की माँ का पावरफुल रोल किया , जो बहुत सराहा गया |<br />
           इसके बाद घर- गृहस्थी में व्यस्त हो गई |</p>
]]></content:encoded>
			<wfw:commentRss>http://www.veenavij.com/list-of-my-stage-plays/feed/</wfw:commentRss>
		<slash:comments>0</slash:comments>
		</item>
		<item>
		<title>सूची</title>
		<link>http://www.veenavij.com/%e0%a4%b8%e0%a5%82%e0%a4%9a%e0%a5%80-3/</link>
		<comments>http://www.veenavij.com/%e0%a4%b8%e0%a5%82%e0%a4%9a%e0%a5%80-3/#comments</comments>
		<pubDate>Sat, 23 Jul 2011 15:39:50 +0000</pubDate>
		<dc:creator>Veena</dc:creator>
				<category><![CDATA[Random]]></category>

		<guid isPermaLink="false">http://www.veenavij.com/?p=361</guid>
		<description><![CDATA[48&#8212;-Hindi Play&#8221;Tootan&#8221;Part &#8211;1 In September&#8211;1994-near Jalandhar By Mr. Mumtaz Beg. 49&#8212;Hindi play &#8220;Tootan&#8221; -part 2 In Sep&#8211;1994&#8211;By same Director 50&#8212;Punjabi Play , &#8220;Udeekaan&#8221;-Part-1 In&#8211;1994&#8211;in a village near Kapurthala&#8211;By -Baldev Salhotra 51&#8212;Punjabi Play- , &#8220;Udeekaan&#8221;-Part 2 In &#8211;1994 , By Baldev Salhotra 52&#8212;&#8221;-Viraasat&#8221; -tele-film in Punjabi My Best ever mother&#8217;s role , shoot at village &#8220;Varyaana&#8221; [...]]]></description>
			<content:encoded><![CDATA[<p>48&#8212;-Hindi Play&#8221;Tootan&#8221;Part &#8211;1<br />
In September&#8211;1994-near Jalandhar By Mr. Mumtaz Beg.</p>
<p>49&#8212;Hindi play &#8220;Tootan&#8221; -part 2<br />
In Sep&#8211;1994&#8211;By same Director</p>
<p>50&#8212;Punjabi Play , &#8220;Udeekaan&#8221;-Part-1<br />
In&#8211;1994&#8211;in a village near Kapurthala&#8211;By -Baldev Salhotra</p>
<p>51&#8212;Punjabi Play- , &#8220;Udeekaan&#8221;-Part 2<br />
In &#8211;1994 , By Baldev Salhotra</p>
<p>52&#8212;&#8221;-Viraasat&#8221; -tele-film in Punjabi<br />
My Best ever mother&#8217;s role , shoot at village &#8220;Varyaana&#8221; in January-1995 , Produced by<br />
Baldev Salhotra</p>
<p>53&#8212;-Programme&#8211;&#8221;LOHRI&#8221; , in punjabi<br />
Shoot at village nr Ludhiana , in , 1992 by&#8211;Balwant Singh.</p>
<p>54&#8212;-Punjabi Play-&#8221;MASEEHA&#8221; , Part 1<br />
Sep&#8211;1995&#8211;By , Baldev Salhotra</p>
<p>55&#8212;&#8221;MASEEHA&#8221; Part 2<br />
Oct&#8211;1995 , by-Baldev Salhotra</p>
<p>56&#8212;Play-&#8221;ZINDAGI&#8221;<br />
In , Nov.-1995</p>
<p>57&#8212;-Hindi-Play , &#8220;Haay RI Kismat&#8221;<br />
In -Jan-1996 , by Vijay Shaayar</p>
<p>58&#8212;Punjabi Play-&#8221;SABAK&#8221;<br />
In&#8211;March-1996-By , Baldev Salhotra</p>
<p>59&#8212;Punjabi-Play , &#8220;PARCHHAAVEN&#8221;<br />
In Sep-1996-By Balwant Singh</p>
<p>60&#8212;Hindi Play-&#8221;UD-BILAAV&#8221;<br />
in -May&#8211;1997 -By-Rajesh Kaul.</p>
<p>61&#8212;-Punjabi-Serial , &#8220;WAAPSI&#8221;<br />
of 52 episodes , in 1999-to-2000 , By a director from Bombay-(Private Production) Regularly telecast on thursday night at ALFA Channel.</p>
<p>62&#8212;-A hindi Tele-Play  &#8220;JALANDHAR DOT COM&#8221;<br />
For the Programme &#8211;&#8221;STAR BEST SELLER&#8221; comes every friday at 1-to3 P.M  on   Star Plus Channel in -1999. (best Daadi Role)</p>
<p>63&#8212;-PunjabiSerial-&#8221;Agg De Kaleere&#8221;<br />
In&#8211;2008 , By Mr.Tadda from Bombay. (Private Production)&#8212;4 episodes.</p>
<p>64&#8212;Punjabi Serial , &#8220;Chann Chadyaa Samudron Paar&#8221; in August-2009 By Mr. Tadda in Tadda village.(Private-Production from Bombay) , a few episodes.</p>
<p>६५&#8212;इसे क्या कहिए , हिन्दी प्रोग्राम<br />
१४&#8211;जून १९९१</p>
<p>६६&#8212;झिल-मिल तारे&#8211;प्रोग्राम<br />
२३ -अक्टूबर , १९९१</p>
<p>६७&#8212;झिल-मिल तारे&#8211;प्रोग्राम&#8211;२<br />
३०-अक्टूबर-१९९१</p>
<p>६८&#8212;झिल-मिल तारे&#8211;प्रोग्राम &#8211;३<br />
नवम्बर&#8211;१९९१</p>
<p>६९&#8212;&#8221;दर्पण&#8221;&#8211;प्रोग्राम&#8211;हिन्दी<br />
-&#8221;घुम्मन  दा नाट-लोक&#8221;&#8211;<br />
२५ -जुलाई&#8211;१९८७</p>
<p>७०&#8212;पंजाबी नाटक , &#8220;वापसी&#8221;<br />
१९८७ , ड़ाय. बल्देव सल्होत्रा</p>
<p>७१&#8212;हिन्दी नाटक , &#8220;अपने-अपने दायरे&#8221;<br />
-१९९३ -ड़ाय.-विजय शायर</p>
<p>७२&#8212;हिन्दी नाटक , &#8220;इंतज़ार&#8221;<br />
शूटिंग &#8216;कल्यानपुर&#8217; में&#8211;४-सित. १९९३&#8211;मि. रैना</p>
<p>७३&#8212;नैशनल -प्ले , &#8216;हिन्दी नाटक&#8217;&#8211;&#8221;मलिया&#8221;<br />
२४ -जून-१९९४&#8211;मैद्दम बब्बू</p>
<p>७४&#8212;हिन्दी नाटक &#8211;&#8221;सन्नाटा&#8221;<br />
४-अक्टूबर -१९९४,-मैड़म बब्बू</p>
<p>७५&#8212;पंजाबी नाटक&#8211;&#8221;दस्तक&#8221;<br />
१ जुलाई , १९९५</p>
<p>७५&#8212;पंजाबी नाटक , &#8220;रेते दी इक मुटठी&#8221;<br />
-२० -जून १९९५</p>
<p>७६&#8212;पंजाबी प्रोग्राम , &#8220;मनके&#8221;<br />
२८-नवम्बर १९९५</p>
<p>७७&#8212;हिन्दी सीरियल , &#8220;ज़िंदगी&#8221;<br />
१३ , मार्च १९९६</p>
<p>७८&#8212;हिन्दी नाटक , &#8220;पहचान&#8221;<br />
जून , १९९६ ड़ाय. -राजेश काँल</p>
<p>७९&#8212;हिन्दी नाटक , &#8220;तौबा मेरी तौबा&#8221;<br />
अगस्त १९९७&#8211;ड़ाय.-राजेश कौल</p>
<p>८०&#8212;हिन्दी नाटक<br />
२७ मार्च १९९८ (चैक ५४००र)</p>
<p>८१&#8212;पंजाबी नाटक<br />
-३० -जुलाई-१९९८ , (चैक ५४००रु)</p>
<p>८२&#8212;हिन्दी नाटक स्क्रिप्ट , &#8220;दरवाज़े&#8221;<br />
चार हिस्सों में&#8211;१२-अगस्त १९९८ &#8211;ड़ाय.लखविन्दर जोहल</p>
<p>८३&#8212;नाटक&#8212;-<br />
४-दिसम्बर १९९८ (चैक -३३००रु.)</p>
<p>८४&#8212;हिन्दी नाटक ,<br />
-१९ -मई-१९९९-(चैक २५००रु.)</p>
<p>अभी तक यही क्रम रहा मेरे दूरद्र्शन के नाटकों का |आगे देखें<br />
कैसे चलेगा ||&#8211;वीणा विज &#8216;उदित&#8217;</p>
<p>मेरे टी.वी सीरियल ,टैली फिल्म्स, फिल्म्स , स्टेज -प्लेज़ ,रेड़ियो -प्रोग्राम्स और अचीवमेंट्स की सूचीः-</p>
<p>सन १९८३ में मेरे जीवन में एक नया मोड़ आया |अपनी खुशहाल ज़िंदगी में अपने तीन बच्चों के साथ रंग भर रही थी कि तभी एक नई राह का नया मोड़ सामने आया और ज़िंदगी उधर मुड़ गई |हुआ यूँ कि मेरे पति-रविजी कश्मीर में भी बिज़नैस करते हैं, सो बच्चों की पढाई के कारण मैं जलंधर में रहती थी |ए.पी. जे स्कूल के प्रिंसिपल के आग्रह</p>
<p>पर मैंने रविजी की अनुपस्थिती में स्कूल में पढाना आरम्भ कर दिया |वहीं हौबी -क्लास में एक दिन भारत-नात्यम की क्लास ले रही थी कि पता चला कि स्कूल मे टी.वी वाले आए हुए हैं | बात आई- गई हो गई |हम गर्मियों में हमेशा की तरह कश्मीर चले गए |</p>
<p>वहाँ से वापिस आने पर टी.वी स्टेशन से फोन आया कि आप कृपया टी.वी स्टेशन पधारें |</p>
<p>हम जून से आपके घर पर कई बार फोन कर चुके हैं , आप मिलती ही नहीं थीं |इतना आसान नहीं था, यह कदम |कुछ दिनों तक मेरे देवर व सास-माँ विरोध व आनाकानी करते रहे ,लेकिन वहाँ से बार-बार फोन आने पर मेरे पति ने मेरा साथ दिया |</p>
<p>वे स्वयं मुझे साथ लेकर टी.वी स्टेशन गए |वहाँ &#8216;नट-सम्राट&#8217; की शूटिंग चल रही थी |उसी में एक रोल के लिए मुझसे ड़ाँयलाँग बुलवाए गए और पहले शाँट में ही सीन ओ.के हो गया |दूर-दर्शन के पहले प्रोड़्यूसर-ड़ायरेक्टर श्री सुरेन्दर साहनी का यह बहुचर्चित प्ले रहा |बस सन २००० तक फिर मैंने पीछे मुड़कर नहीं देखा |अब यदाकदा प्राइवेट सीरियल्स में गैस्ट-अपीयरेंस दे देती हूँ |निम्नलिखित हैं मेरे विभिन्न कार्य&#8212;&#8211;</p>
<p>नाटक-</p>
<p>१ &#8211;नट-सम्राट&#8211;१९८३, भाषा-हिन्दी, ड़ायरेक्टर-सुरेन्द्र साहनी</p>
<p>नाटक-</p>
<p>२&#8211;मेंहदी वाले हत्थ्-१९८४, भाषा-पंजाबी, ड़ायरेक्टर-बल्देव सल्होत्रा (मेन रोल)</p>
<p>सीरियल-</p>
<p>३&#8211;&#8217;दस हजार&#8217;-१९८६-८७, भाषा-पंजाबी, ड़ायरेक्टर-सुरेन्द्र साहनी (५ एपीसोड़)</p>
<p>नाटक-</p>
<p>४&#8211;&#8217;दीवारें&#8217;-१९८६-नव. ,भाषा- हिन्दी ,ड़ायरेक्टर-ज़ाहिद मंज़ूर (मेन रोल)</p>
<p>नाटक-</p>
<p>५&#8211;मनी प्लाँट&#8217;-सित.१९८६ , भाषा- पंजाबी, ड़ायरेक्टर-मि. बावा</p>
<p>नाटक-</p>
<p>६&#8211;&#8217;दो पलकाँ&#8217;-अक्टू-१९८६, भाषा-पंजाबी , ड़ायरेक्टर-रविदीप</p>
<p>पिटारी प्रोग्राम</p>
<p>७&#8211;&#8217;फिल्मी भूत&#8217;-फरवरी १९८७ , भाषा-पंजाबी , ड़ाय.&#8211;रविदीप</p>
<p>नाटक</p>
<p>८&#8211;कोठे खड़कसिंग&#8217;&#8211;फरवरी १९८७ , भाषा-पंजाबी , ड़ाय. &#8211;मि. सुरेन्द्र शर्मा</p>
<p>नैशनल हुक- अप के लिए नाटक</p>
<p>९&#8211;&#8217;सोहनी-महिवाल&#8217;&#8211;फरवरी-१९८७ , भाषा-हिन्दी , ड़ाय-मि. सुरेन्द्र शर्मा</p>
<p>प्रोग्राम&#8211;</p>
<p>१०&#8211;कुदरत दे सब बन्दे&#8212;फर-मार्च-१९८७ ,भाषा-पंजाबी , ड़ाय. &#8211; रविदीप</p>
<p>नाटक&#8211;</p>
<p>११&#8211;&#8217;इंसानियत&#8217; &#8212;मार्च -१९८७ , भाषा-हिन्दी , ड़ाय.&#8211;हरजीत सिंग</p>
<p>प्रोग्राम&#8211;&#8221;नागरिक&#8221;</p>
<p>१२&#8211;&#8217;शगन&#8217;&#8212;मार्च-१९८७ , भाषा-हिन्दी , ड़ाय.&#8211;रविदीप</p>
<p>नाटक&#8211;</p>
<p>१३&#8212;&#8217;फरियाद&#8217;- अप्रैल-१९८७ , भाषा-हिन्दी , ड़ाय.&#8211;मि.रैना</p>
<p>प्रोग्राम -&#8221;दर्पण&#8221; में नाटक</p>
<p>१४&#8212;&#8221;मूक-संसार&#8221;&#8211;जुलाई-१९८७ , भाषा-हिन्दी , ड़ाय&#8211;रविदीप</p>
<p>टैली-प्ले&#8211;</p>
<p>१५&#8212;&#8221;प्रतिज्ञा&#8221;&#8211;सितम्बर-१९८७ , भाषा-हिन्दी , ड़ाय.&#8211;मि.कौल (बहु चर्चित मेन-रोल)</p>
<p>प्रोग्राम&#8211;&#8217;नागरिक&#8217;</p>
<p>१६&#8212;लड़ीवार नाटक&#8211;दिसम्बर-१९८७ , भाषा-हिन्दी , ड़ाय&#8211;रविदीप</p>
<p>नाटक&#8211;</p>
<p>१७&#8212;&#8221;इदुल फितर&#8221;&#8211;मई-१९८८ , भाषा-हिन्दी+उर्दू , ड़ाय. &#8211;राजेश कौल</p>
<p>नाटक&#8211;</p>
<p>१८&#8212;&#8217;संत सिपाही&#8217;&#8211;दिस.-१९८८ , भाषा-पंजाबी , ड़ाय.&#8211;बावाजी</p>
<p>नाटक&#8211;</p>
<p>१९&#8212;&#8221;दूर-किनारे&#8221;&#8211;मार्च-१९८९ , भाषा-हिन्दी , ड़ाय.&#8211;राजेश कौल</p>
<p>नाटक&#8211;</p>
<p>२०&#8212;&#8221;विश्वास&#8221; , अप्रैल-१९८९ , भाषा-हिन्दी , ड़ाय.&#8211;राजेश कौल</p>
<p>प्रोग्राम&#8211;&#8217;रचना&#8217;&#8211;</p>
<p>२१&#8212; &#8216;शंका&#8217; , जनवरी-१९९० , भाषा-हिन्दी , ड़ाय.&#8211;रविदीप</p>
<p>नाटक&#8211;</p>
<p>२२&#8212;&#8221;एक प्रश्न&#8221; , फरवरी-१९९० , भाषा-हिन्दी , ड़ाय. &#8211;सुरेन्द्र शर्मा ( मेन रोल)</p>
<p>टैली प्ले&#8211;</p>
<p>२३&#8212;&#8221;पारो दी वापसी&#8221; ,जुलाई-१९९० , भाषा- पंजाबी, ड़ाय. &#8211;बल्देव सल्होत्रा , गाँव-बल्लाँ</p>
<p>बहुत मशहूर रोल था ,जलंधर की सब अख़बारों में फोटोस छपीं थीं |</p>
<p>नाटक&#8211;</p>
<p>२४&#8212;&#8221;मुफलिस का रेड़ियो&#8221; , अगस्त-१९९० , भाषा-हिन्दी , ड़ाय. -मि. कौल</p>
<p>नाटक&#8211;</p>
<p>२५&#8212;&#8221;नई कविता&#8221; , सितम्बर-१९९० , भाषा-हिन्दी , ड़ाय.-रविदीप</p>
<p>प्रोग्राम&#8211;&#8221;रौनक्-मेला &#8221;</p>
<p>२६&#8212;दिसम्बर-१९९० , भाषा-पंजाबी</p>
<p>नाटक&#8211;</p>
<p>२७&#8212;&#8221;फरिश्ता&#8221; , फरवरी-१९९० , भाषा-हिन्दी , ड़ाय.&#8211;राजेश काँल</p>
<p>धारावाहिक-नाटक</p>
<p>२८&#8212;&#8217;कुज-पतरे&#8217; , फरवरी-१९९१ , भाषा-पंजाबी ,</p>
<p>नाटक&#8211;</p>
<p>२९&#8212;&#8221;काली रोशनी&#8221; , १९९१ , भाषा- हिन्दी , ड़ाय.-सुरेन्द्र शर्मा</p>
<p>(मेन-रोल)</p>
<p>३०&#8212;हिन्दी नाटक&#8211;</p>
<p>&#8220;बस और नहीं&#8221; , सितम्बर-१९९१ , ड़ाय. &#8211;राजेश कौल</p>
<p>३१&#8211;हिन्दी&#8211;नाटक</p>
<p>&#8220;चुनरी&#8221; , जनवरी-१९९२&#8212;&#8211;</p>
<p>३२&#8211;प्रोग्राम-हर हफ्ते&#8211;</p>
<p>&#8220;दस्सो कौन?&#8221; , जनवरी-१९९२ से&#8212;-१० हफ्तों तक , भाषा- पंजाबी , ड़ाय. &#8211;रवि दीप</p>
<p>10&#8212;sh0ws</p>
<p>42&#8212;-Lohri-Programme(tele -Film)&#8211;Main -role<br />
in punjabi-January-1992 , in a village near Ludhiana by Director&#8211;Balwant Singh.<br />
43&#8212;Play-<br />
Scenes from a Famous Novel , January-1992 , By &#8211;Ravi deep<br />
44&#8212;Play-<br />
Scenes from a famous Writer&#8217;s novel in Punjabi&#8212;in February-1992 , by Ravideep.<br />
45&#8212;Hindi Play-<br />
&#8220;ek Mod Par&#8221; , (main role) in February-1992 , by Rajesh Kaul.<br />
46&#8212;Hindi Play&#8211;<br />
&#8220;Armaan&#8221;-(main-role) , in August-1992 , by Baldev Salhotra.(much appreciated)<br />
47&#8211;Hindi Serial-<br />
&#8220;Ehsaas&#8221;-1993&#8212;-By -Rajesh Kaul.</p>
<p>रोहित विज </p>
]]></content:encoded>
			<wfw:commentRss>http://www.veenavij.com/%e0%a4%b8%e0%a5%82%e0%a4%9a%e0%a5%80-3/feed/</wfw:commentRss>
		<slash:comments>0</slash:comments>
		</item>
		<item>
		<title>सूची&#8211;</title>
		<link>http://www.veenavij.com/%e0%a4%b8%e0%a5%82%e0%a4%9a%e0%a5%80-2/</link>
		<comments>http://www.veenavij.com/%e0%a4%b8%e0%a5%82%e0%a4%9a%e0%a5%80-2/#comments</comments>
		<pubDate>Thu, 21 Jul 2011 18:23:10 +0000</pubDate>
		<dc:creator>Veena</dc:creator>
				<category><![CDATA[Random]]></category>

		<guid isPermaLink="false">http://www.veenavij.com/?p=347</guid>
		<description><![CDATA[The list of my T.V shows, The films I acted in, the radio - programmes I did, the stage -shows I performed, the achievements I was recognised for.]]></description>
			<content:encoded><![CDATA[<p>48&#8212;-Hindi Play&#8221;Tootan&#8221;Part &#8211;1<br />
In September&#8211;1994-near Jalandhar By Mr. Mumtaz Beg.</p>
<p>49&#8212;Hindi play &#8220;Tootan&#8221; -part 2<br />
In Sep&#8211;1994&#8211;By same Director</p>
<p>50&#8212;Punjabi Play , &#8220;Udeekaan&#8221;-Part-1<br />
In&#8211;1994&#8211;in a village near Kapurthala&#8211;By -Baldev Salhotra</p>
<p>51&#8212;Punjabi Play- , &#8220;Udeekaan&#8221;-Part 2<br />
In &#8211;1994 , By Baldev Salhotra</p>
<p>52&#8212;&#8221;-Viraasat&#8221; -tele-film in Punjabi<br />
My Best ever mother&#8217;s role , shoot at village &#8220;Varyaana&#8221; in January-1995 , Produced by<br />
Baldev Salhotra</p>
<p>53&#8212;-Programme&#8211;&#8221;LOHRI&#8221; , in punjabi<br />
Shoot at village nr Ludhiana , in , 1992 by&#8211;Balwant Singh.</p>
<p>54&#8212;-Punjabi Play-&#8221;MASEEHA&#8221; , Part 1<br />
Sep&#8211;1995&#8211;By , Baldev Salhotra</p>
<p>55&#8212;&#8221;MASEEHA&#8221; Part 2<br />
Oct&#8211;1995 , by-Baldev Salhotra</p>
<p>56&#8212;Play-&#8221;ZINDAGI&#8221;<br />
In , Nov.-1995</p>
<p>57&#8212;-Hindi-Play , &#8220;Haay RI Kismat&#8221;<br />
In -Jan-1996 , by Vijay Shaayar</p>
<p>58&#8212;Punjabi Play-&#8221;SABAK&#8221;<br />
In&#8211;March-1996-By , Baldev Salhotra</p>
<p>59&#8212;Punjabi-Play , &#8220;PARCHHAAVEN&#8221;<br />
In Sep-1996-By Balwant Singh</p>
<p>60&#8212;Hindi Play-&#8221;UD-BILAAV&#8221;<br />
in -May&#8211;1997 -By-Rajesh Kaul.</p>
<p>61&#8212;-Punjabi-Serial , &#8220;WAAPSI&#8221;<br />
of 52 episodes , in 1999-to-2000 , By a director from Bombay-(Private Production) Regularly telecast on thursday night at ALFA Channel.</p>
<p>62&#8212;-A hindi Tele-Play  &#8220;JALANDHAR DOT COM&#8221;<br />
For the Programme &#8211;&#8221;STAR BEST SELLER&#8221; comes every friday at 1-to3 P.M  on   Star Plus Channel in -1999. (best Daadi Role)</p>
<p>63&#8212;-PunjabiSerial-&#8221;Agg De Kaleere&#8221;<br />
In&#8211;2008 , By Mr.Tadda from Bombay. (Private Production)&#8212;4 episodes.</p>
<p>64&#8212;Punjabi Serial , &#8220;Chann Chadyaa Samudron Paar&#8221; in August-2009 By Mr. Tadda in Tadda village.(Private-Production from Bombay) , a few episodes.</p>
<p>*************************************</p>
<p>मेरे टी.वी सीरियल ,टैली फिल्म्स, फिल्म्स , स्टेज -प्लेज़ ,रेड़ियो -प्रोग्राम्स और अचीवमेंट्स की सूचीः-</p>
<p>सन १९८३ में मेरे जीवन में एक नया मोड़ आया |अपनी खुशहाल ज़िंदगी में अपने तीन बच्चों के साथ रंग भर रही थी कि तभी एक नई राह का नया मोड़ सामने आया और ज़िंदगी उधर मुड़ गई |हुआ यूँ कि मेरे पति-रविजी कश्मीर में भी बिज़नैस करते हैं, सो बच्चों की पढाई के कारण मैं जलंधर में रहती थी |ए.पी. जे स्कूल के प्रिंसिपल के आग्रह</p>
<p>पर मैंने रविजी की अनुपस्थिती में स्कूल में पढाना आरम्भ कर दिया |वहीं हौबी -क्लास में एक दिन भारत-नात्यम की क्लास ले रही थी कि पता चला कि स्कूल मे टी.वी वाले आए हुए हैं | बात आई- गई हो गई |हम गर्मियों में हमेशा की तरह कश्मीर चले गए |</p>
<p>वहाँ से वापिस आने पर टी.वी स्टेशन से फोन आया कि आप कृपया टी.वी स्टेशन पधारें |</p>
<p>हम जून से आपके घर पर कई बार फोन कर चुके हैं , आप मिलती ही नहीं थीं |इतना आसान नहीं था, यह कदम |कुछ दिनों तक मेरे देवर व सास-माँ विरोध व आनाकानी करते रहे ,लेकिन वहाँ से बार-बार फोन आने पर मेरे पति ने मेरा साथ दिया |</p>
<p>वे स्वयं मुझे साथ लेकर टी.वी स्टेशन गए |वहाँ &#8216;नट-सम्राट&#8217; की शूटिंग चल रही थी |उसी में एक रोल के लिए मुझसे ड़ाँयलाँग बुलवाए गए और पहले शाँट में ही सीन ओ.के हो गया |दूर-दर्शन के पहले प्रोड़्यूसर-ड़ायरेक्टर श्री सुरेन्दर साहनी का यह बहुचर्चित प्ले रहा |बस सन २००० तक फिर मैंने पीछे मुड़कर नहीं देखा |अब यदाकदा प्राइवेट सीरियल्स में गैस्ट-अपीयरेंस दे देती हूँ |निम्नलिखित हैं मेरे विभिन्न कार्य&#8212;&#8211;</p>
<p>नाटक-</p>
<p>१ &#8211;नट-सम्राट&#8211;१९८३, भाषा-हिन्दी, ड़ायरेक्टर-सुरेन्द्र साहनी</p>
<p>नाटक-</p>
<p>२&#8211;मेंहदी वाले हत्थ्-१९८४, भाषा-पंजाबी, ड़ायरेक्टर-बल्देव सल्होत्रा (मेन रोल)</p>
<p>सीरियल-</p>
<p>३&#8211;&#8217;दस हजार&#8217;-१९८६-८७, भाषा-पंजाबी, ड़ायरेक्टर-सुरेन्द्र साहनी (५ एपीसोड़)</p>
<p>नाटक-</p>
<p>४&#8211;&#8217;दीवारें&#8217;-१९८६-नव. ,भाषा- हिन्दी ,ड़ायरेक्टर-ज़ाहिद मंज़ूर (मेन रोल)</p>
<p>नाटक-</p>
<p>५&#8211;मनी प्लाँट&#8217;-सित.१९८६ , भाषा- पंजाबी, ड़ायरेक्टर-मि. बावा</p>
<p>नाटक-</p>
<p>६&#8211;&#8217;दो पलकाँ&#8217;-अक्टू-१९८६, भाषा-पंजाबी , ड़ायरेक्टर-रविदीप</p>
<p>पिटारी प्रोग्राम</p>
<p>७&#8211;&#8217;फिल्मी भूत&#8217;-फरवरी १९८७ , भाषा-पंजाबी , ड़ाय.&#8211;रविदीप</p>
<p>नाटक</p>
<p>८&#8211;कोठे खड़कसिंग&#8217;&#8211;फरवरी १९८७ , भाषा-पंजाबी , ड़ाय. &#8211;मि. सुरेन्द्र शर्मा</p>
<p>नैशनल हुक- अप के लिए नाटक</p>
<p>९&#8211;&#8217;सोहनी-महिवाल&#8217;&#8211;फरवरी-१९८७ , भाषा-हिन्दी , ड़ाय-मि. सुरेन्द्र शर्मा</p>
<p>प्रोग्राम&#8211;</p>
<p>१०&#8211;कुदरत दे सब बन्दे&#8212;फर-मार्च-१९८७ ,भाषा-पंजाबी , ड़ाय. &#8211; रविदीप</p>
<p>नाटक&#8211;</p>
<p>११&#8211;&#8217;इंसानियत&#8217; &#8212;मार्च -१९८७ , भाषा-हिन्दी , ड़ाय.&#8211;हरजीत सिंग</p>
<p>प्रोग्राम&#8211;&#8221;नागरिक&#8221;</p>
<p>१२&#8211;&#8217;शगन&#8217;&#8212;मार्च-१९८७ , भाषा-हिन्दी , ड़ाय.&#8211;रविदीप</p>
<p>नाटक&#8211;</p>
<p>१३&#8212;&#8217;फरियाद&#8217;- अप्रैल-१९८७ , भाषा-हिन्दी , ड़ाय.&#8211;मि.रैना</p>
<p>प्रोग्राम -&#8221;दर्पण&#8221; में नाटक</p>
<p>१४&#8212;&#8221;मूक-संसार&#8221;&#8211;जुलाई-१९८७ , भाषा-हिन्दी , ड़ाय&#8211;रविदीप</p>
<p>टैली-प्ले&#8211;</p>
<p>१५&#8212;&#8221;प्रतिज्ञा&#8221;&#8211;सितम्बर-१९८७ , भाषा-हिन्दी , ड़ाय.&#8211;मि.कौल (बहु चर्चित मेन-रोल)</p>
<p>प्रोग्राम&#8211;&#8217;नागरिक&#8217;</p>
<p>१६&#8212;लड़ीवार नाटक&#8211;दिसम्बर-१९८७ , भाषा-हिन्दी , ड़ाय&#8211;रविदीप</p>
<p>नाटक&#8211;</p>
<p>१७&#8212;&#8221;इदुल फितर&#8221;&#8211;मई-१९८८ , भाषा-हिन्दी+उर्दू , ड़ाय. &#8211;राजेश कौल</p>
<p>नाटक&#8211;</p>
<p>१८&#8212;&#8217;संत सिपाही&#8217;&#8211;दिस.-१९८८ , भाषा-पंजाबी , ड़ाय.&#8211;बावाजी</p>
<p>नाटक&#8211;</p>
<p>१९&#8212;&#8221;दूर-किनारे&#8221;&#8211;मार्च-१९८९ , भाषा-हिन्दी , ड़ाय.&#8211;राजेश कौल</p>
<p>नाटक&#8211;</p>
<p>२०&#8212;&#8221;विश्वास&#8221; , अप्रैल-१९८९ , भाषा-हिन्दी , ड़ाय.&#8211;राजेश कौल</p>
<p>प्रोग्राम&#8211;&#8217;रचना&#8217;&#8211;</p>
<p>२१&#8212; &#8216;शंका&#8217; , जनवरी-१९९० , भाषा-हिन्दी , ड़ाय.&#8211;रविदीप</p>
<p>नाटक&#8211;</p>
<p>२२&#8212;&#8221;एक प्रश्न&#8221; , फरवरी-१९९० , भाषा-हिन्दी , ड़ाय. &#8211;सुरेन्द्र शर्मा ( मेन रोल)</p>
<p>टैली प्ले&#8211;</p>
<p>२३&#8212;&#8221;पारो दी वापसी&#8221; ,जुलाई-१९९० , भाषा- पंजाबी, ड़ाय. &#8211;बल्देव सल्होत्रा , गाँव-बल्लाँ</p>
<p>बहुत मशहूर रोल था ,जलंधर की सब अख़बारों में फोटोस छपीं थीं |</p>
<p>नाटक&#8211;</p>
<p>२४&#8212;&#8221;मुफलिस का रेड़ियो&#8221; , अगस्त-१९९० , भाषा-हिन्दी , ड़ाय. -मि. कौल</p>
<p>नाटक&#8211;</p>
<p>२५&#8212;&#8221;नई कविता&#8221; , सितम्बर-१९९० , भाषा-हिन्दी , ड़ाय.-रविदीप</p>
<p>प्रोग्राम&#8211;&#8221;रौनक्-मेला &#8221;</p>
<p>२६&#8212;दिसम्बर-१९९० , भाषा-पंजाबी</p>
<p>नाटक&#8211;</p>
<p>२७&#8212;&#8221;फरिश्ता&#8221; , फरवरी-१९९० , भाषा-हिन्दी , ड़ाय.&#8211;राजेश काँल</p>
<p>धारावाहिक-नाटक</p>
<p>२८&#8212;&#8217;कुज-पतरे&#8217; , फरवरी-१९९१ , भाषा-पंजाबी ,</p>
<p>नाटक&#8211;</p>
<p>२९&#8212;&#8221;काली रोशनी&#8221; , १९९१ , भाषा- हिन्दी , ड़ाय.-सुरेन्द्र शर्मा</p>
<p>(मेन-रोल)</p>
<p>३०&#8212;हिन्दी नाटक&#8211;</p>
<p>&#8220;बस और नहीं&#8221; , सितम्बर-१९९१ , ड़ाय. &#8211;राजेश कौल</p>
<p>३१&#8211;हिन्दी&#8211;नाटक</p>
<p>&#8220;चुनरी&#8221; , जनवरी-१९९२&#8212;&#8211;</p>
<p>३२&#8211;प्रोग्राम-हर हफ्ते&#8211;</p>
<p>&#8220;दस्सो कौन?&#8221; , जनवरी-१९९२ से&#8212;-१० हफ्तों तक , भाषा- पंजाबी , ड़ाय. &#8211;रवि दीप</p>
<p>10&#8212;sh0ws</p>
<p>** * * * * * * * * * * *<br />
42&#8212;-Lohri-Programme(tele -Film)&#8211;Main -role<br />
in punjabi-January-1992 , in a village near Ludhiana by Director&#8211;Balwant Singh.<br />
43&#8212;Play-<br />
Scenes from a Famous Novel , January-1992 , By &#8211;Ravi deep<br />
44&#8212;Play-<br />
Scenes from a famous Writer&#8217;s novel in Punjabi&#8212;in February-1992 , by Ravideep.<br />
45&#8212;Hindi Play-<br />
&#8220;ek Mod Par&#8221; , (main role) in February-1992 , by Rajesh Kaul.<br />
46&#8212;Hindi Play&#8211;<br />
&#8220;Armaan&#8221;-(main-role) , in August-1992 , by Baldev Salhotra.(much appreciated)<br />
47&#8211;Hindi Serial-<br />
&#8220;Ehsaas&#8221;-1993&#8212;-By -Rajesh Kaul.</p>
<p>धारावाहिक नाटक&#8211;&#8221;टूटन&#8221; भाग&#8211;१</p>
]]></content:encoded>
			<wfw:commentRss>http://www.veenavij.com/%e0%a4%b8%e0%a5%82%e0%a4%9a%e0%a5%80-2/feed/</wfw:commentRss>
		<slash:comments>0</slash:comments>
		</item>
		<item>
		<title>हजारे के हाथ ,हम हैं साथ्!</title>
		<link>http://www.veenavij.com/%e0%a4%b9%e0%a4%9c%e0%a4%be%e0%a4%b0%e0%a5%87-%e0%a4%95%e0%a5%87-%e0%a4%b9%e0%a4%be%e0%a4%a5-%e0%a4%b9%e0%a4%ae-%e0%a4%b9%e0%a5%88%e0%a4%82-%e0%a4%b8%e0%a4%be%e0%a4%a5%e0%a5%8d/</link>
		<comments>http://www.veenavij.com/%e0%a4%b9%e0%a4%9c%e0%a4%be%e0%a4%b0%e0%a5%87-%e0%a4%95%e0%a5%87-%e0%a4%b9%e0%a4%be%e0%a4%a5-%e0%a4%b9%e0%a4%ae-%e0%a4%b9%e0%a5%88%e0%a4%82-%e0%a4%b8%e0%a4%be%e0%a4%a5%e0%a5%8d/#comments</comments>
		<pubDate>Fri, 08 Apr 2011 06:41:26 +0000</pubDate>
		<dc:creator>Veena</dc:creator>
				<category><![CDATA[Random]]></category>

		<guid isPermaLink="false">http://www.veenavij.com/?p=235</guid>
		<description><![CDATA[समाज-सेवी अन्ना हजारे ने जो मुहिम छेड़ा है ,वह हम और आप सब के मन की आवाज़ है&#124;भ्रष्टाचार के ख़िलाफ हम भी आवाज़ उठाना चाहते हैं&#124; आज से नहीं सालों से&#124;लेकिन चुपचाप घर में बैठ जाते हैं , रोकर या कुढ-कुढ़कर बस अपने चार पहचान के लोगों से बातें करके मन की भड़ास निकाल लेते [...]]]></description>
			<content:encoded><![CDATA[<p>समाज-सेवी अन्ना हजारे ने जो मुहिम छेड़ा है ,वह हम और आप सब के मन की आवाज़ है|भ्रष्टाचार के ख़िलाफ हम भी आवाज़ उठाना चाहते हैं| आज से नहीं सालों से|लेकिन चुपचाप घर में बैठ जाते हैं , रोकर या कुढ-कुढ़कर<br />
बस अपने चार पहचान के लोगों से बातें करके मन की भड़ास निकाल लेते हैं |उठकर सामने नहीं आते हैं |<br />
बोफर्स का मामला है या चारा-घोटाला, क्या हुआ? रोज़ की ख़बरों का यह एक हिस्सा बन चुकी हैं ख़बरें |हम सबको बधाई है कि आज यह आवाज़ बुलंद हुई है |फलस्वरूप एक विकट गिर गया है!!!!<br />
चलिए हम सब प्रार्थना करें, यज्ञ करें&#8212;इस मुहिम की सफलता के लिए!!!!&#8230;&#8230;&#8230;&#8230;..वीणा विज &#8216;उदित्&#8217;</p>
]]></content:encoded>
			<wfw:commentRss>http://www.veenavij.com/%e0%a4%b9%e0%a4%9c%e0%a4%be%e0%a4%b0%e0%a5%87-%e0%a4%95%e0%a5%87-%e0%a4%b9%e0%a4%be%e0%a4%a5-%e0%a4%b9%e0%a4%ae-%e0%a4%b9%e0%a5%88%e0%a4%82-%e0%a4%b8%e0%a4%be%e0%a4%a5%e0%a5%8d/feed/</wfw:commentRss>
		<slash:comments>0</slash:comments>
		</item>
		<item>
		<title>इक फौजी की दास्तान</title>
		<link>http://www.veenavij.com/%e0%a4%87%e0%a4%95-%e0%a4%ab%e0%a5%8c%e0%a4%9c%e0%a5%80-%e0%a4%95%e0%a5%80-%e0%a4%a6%e0%a4%be%e0%a4%b8%e0%a5%8d%e0%a4%a4%e0%a4%be%e0%a4%a8/</link>
		<comments>http://www.veenavij.com/%e0%a4%87%e0%a4%95-%e0%a4%ab%e0%a5%8c%e0%a4%9c%e0%a5%80-%e0%a4%95%e0%a5%80-%e0%a4%a6%e0%a4%be%e0%a4%b8%e0%a5%8d%e0%a4%a4%e0%a4%be%e0%a4%a8/#comments</comments>
		<pubDate>Thu, 24 Mar 2011 18:40:45 +0000</pubDate>
		<dc:creator>Veena</dc:creator>
				<category><![CDATA[Random]]></category>

		<guid isPermaLink="false">http://www.veenavij.com/?p=189</guid>
		<description><![CDATA[a story about the life and experiences of an army man on the border area.]]></description>
			<content:encoded><![CDATA[<p>हमेशा की तरह स्टेशन पर इतनी भीड़् !! इस बार दिल्ली से अमृतसर जानेवाली शताब्दी एक्सप्रेस ट्रेन में शाम को बैठते ही लगा, सफ़्रर काटने के लिए मेरे विचारों का सफ़र मुझे यूं अपने में बाँध लेगा कि पाँच घंटॉं का सफ़र अकेले पता भी नहीं चलेगा |फिर क्या सोचना भीड़ का, और क्या अकेलापन?बैठते ही अख़बारों का पुलंदा हाथ में ले लिया | मेन ख़बरों पर सरसरी नज़र डाली | खुशवन्तसिंग का काँलम मैं अवश्य पढती हूँ,लेकिन वो भी ध्यान को बाँध नहीं सका |इस बीच साथ वाली सीट पर एक नौजवान लड़का आकर बैठ गया था |तभी वेटर चाय व जूस लेकर आ गया |लगा ,ये रेल्वे वाले ठंडा और गरम पेय एकसाथ क्यों सर्व करते हैं?मन ही मन खीझकर , चाय तो पी ही ली |तदोपरांत, विचारों के सफ़र पर जाने की तैयारी में ही थी कि साथवाले नौजवान ने पूछा, &#8220;आप भी अमृतसर जा रही हैं?&#8221;यानि कि वह अमृतसर का मुसाफिर था |&#8221;नहीं मैं जलंधर जा रही हूँ,&#8221; मैंने उत्तर दिया , व पुनः हाथ में अख़बार उठा ली |दो अंजाने मुसाफ़िर जब बस या रेलगाड़ी में साथ बैठते हैं,तो ऍसा सवाल आम तौर पर कर ही लेते हैं |सो मैने ख़ास तवज्जो नहीं दी |डिब्बे में बच्चों की चिल्लपों, सप्तम स्वर में सैल फोन पर तरह-तरह की बातें,आपस में ऊँची आवाज़ में बातें&#8211;सब मिलाकर शोर असह्य हो रहा था |लेकिन &#8211; कुछ नहीं हो सकता था |<br />
बाहर देशों में sub-way (train)पर सफ़र करो , तो केवल पटरी बदलने की आवाजों के कुछ और सुनाई नहीं देता |दूर क्या जाना? आज से तकरीबन बीस साल पहले कन्याकुमारी से त्रिवन्तापुरम का सफ़र हमने रेल से किया था |वहाँ हर मुसाफ़िर के हाथ में कोई न कोई किताब, मैग़ज़िन या अख़बार था, जिसे वह पढ रहा था |तीन घंटॉं का एकदम शांत सफ़र ! वह मंज़र आज भी आँखों में बसा हुआ है |केरल के लोगों के लिए मन में तभी से आदर आ गया है |काश!&#8230;.<br />
सोचा, थोड़ा सो ही लेती हूँ; कि तभी कानों में आवाज़ पड़ी,&#8221; मैडम जी! यह गाड़ी यहाँ क्यों रुकी है?&#8221; मुझे भी लगा, सो मैंने आँखें खोलकर बाहर देखने का यत्न किया|आबादी से दूर खड़ी थी गाड़ी |&#8221;लगता है किसी गाड़ी को पास देना होगा&#8221;, कहकर मैं चुप हो गई|गाड़ी बार-बार खड़ी हो रही थी, न मालूम क्यों? रेल्वे की मर्ज़ी है,जब गन्तव्य पर पहुँचाएगी &#8211;तभी तो पहुँचेंगे न! कि तभी वह फिर बोला,&#8221;गाड़ी इस तरह चलेगी ,तो अमृतसर पहुँचने में आधी रात हो जाएगी न !जलंधर से अमृतसर पहुँचने में कितने धंटे लगेगें जी? &#8220;लगा यह बातें करना चाहता है, मुँह फेर लूँ |पर इंसानियत के नाते पूछ बैठी,&#8221;क्या कहीं बाहर से आ रहे हो? झट बोला,&#8221;जी हाँ मैं गोहाटी से आ रहा हूँ|फौजी हूँ| इंक्यावन दिनों की छुट्टी पर घर जा रहा हूँ |अमृतसर से मुक्सर जिला बँगेवाला जाना होगा |&#8221; लगा, बेचारा सच ही तो कह रहा है, उसे आधीरात हो जाएगी घर तक पहुँचते |लेकिन &#8212;कोई चारा  नहीं था|<br />
उसके हाथ में सैल फोन था |उसने उसमें मुझे फोटो दिखाते हुए कहा,&#8221;मैडम जी !यह देखो पानी का झरना बर्फ़ का बन गया है |यह किनारे हमारी फौजी गाड़ी बर्फ़ में फँसी है | (मैंने पास होकर ध्यान से देखा) वहाँ हमेशा बर्फ रहती है |बहुत ठंड़ होती है जी ! गोहाटी (आसाम) से सौ कि.मी.पर Sanga Training Camp है, वहाँ तक तो फौजी गाड़ियों से जाया जाता है|उससे आगे हमारे बेस कैम्प तक बर्फ़ ही बर्फ़ है, वहाँ गाड़ी नहीं जाती |हमें वहाँ तक पहुँचने के लिए पैंतीस कि. मी. बर्फ़ में लम्बे-ल्म्बे बूट पहनकर चलना होता है |&#8221;उसकी बातें सुनकर मेरी रुचि उसमें बढ रही थी |मैंने पूछा,&#8221;आप इतनी बर्फ़ में क्यों बैठे हो वहाँ? आपके कैम्प में कितने लोग होते हैं ?यह कौन सी रेजीमेंट है?&#8221; उसे जैसे मन चाही मुराद मिल गई हो |अपने मीलों लम्बे सफ़र की मंज़िल क़रीब जानकर शायद वो चंद बातें साँझी करके वक़्त को पीछे धकेलना चाह रहा था |उसमें बातें करने की उमंग जाग गई ,साफ़ दिखाई दे रही थी| वह बहुत अदब से धीमी आवाज़ में बात कर रहा था|उसने बोला,&#8221;जी मैं अंग्रेज़सिंग, उम्र तीस साल ; फौज में पिछले बारह साल से सिपाही हूँ |मेरे घर में बापूजी, माँ,बीवी और तीन साल का एक बेटा है |मेरा छोटा भाई भी पंजाब में फौज में है |बापूजी भी फौज से रिटायर हुए हैं |हमारी पंजाब रेजीमेंट है | मेरे बेस कैम्प में २५ सिपाही, १ अफ़सर (लेफ्टीनेंट)और १ जे.सी.ओ है |वहाँ चीन से भारत के बाँर्डर की सुरक्षा के लिए हम बुखारिया में तैनात हैं |चीन और भारत का समझौता हुआ था कि २०११ तक वहाँ हमला नहीं होगा , लेकिन अब इसकी मियाद बढा कर २०१५ कर दी गई है |&#8221; मुझसे रहा नहीं गया मैं बीच में ही बोल पड़ी,&#8221;ऍसा है तो फिर आप बर्फों में क्यों बैठे हो?&#8221;वो बोला,&#8221; जी! ये तो सरकारों की बातें हैं| हम फौजियों ने तो ड्यूटी करनी है|हाँ मन में तसल्ली रहती है कि अगर हमला नहीं हुआ, तो जान सलामत रहेगी |फिर भी हम चौकन्ने रहकर दिन-रात पहरा देते हैं |इनका क्या भरोसा? &#8221; उसी पल से मेरा मन उस नौजवान सिपाही के लिए आदर से भर उठा | सर्दियों में हम फ्रिज का पानी तक नहीं पी सकते ;और कहाँ यह फौजी हमारी सरहदों की रक्षा करने और हमें चैन से जीने देने के लिए दिन-रात फ्रीजिंग टैम्परेचर में सोते -जागते व रहते हैं |मेरी उत्सुकता बढती जा रही थी| मैंने पूछा, &#8220;तुम लोग बर्फ़ पर खाना कैसे बनाते हो?नहाते व सब रोजमर्रा के काम कैसे करते हो?&#8221;इस पर वह हल्का सा मुस्कुरा कर बोल उठा,&#8221;मैडमजी! खाना वहाँ कैसे बन सकता है? हर दिन हैलीकाँप्टर हमारे खाने के पैकेट गिरा जाता है| हमारे पास अपने-अपने चार बर्तन होते हैं |रही बात नहाने की; तो महीने , दो महीने में पानी गरम करके शरीर पर डाल लेते हैं |&#8221;<br />
&#8220;वहाँ वक्त काटने के लिए टी.वी का सहारा होता होगा न!&#8221;, मैंने फिर पूछा|<br />
&#8220;कहाँ मैडमजी!  वहाँ टी.वी नहीं होते |सैल फोन में कुछ गाने भरे होते हैं, वो भी कितनी बार सुनो? बस पहरा देना ही हमारा जीवन है |बंदूक उठाकर बर्फ़ में अपनी-अपनी पोज़ीशन पर खड़े रहना| वैसे कोई बात नहीं|(शान से ) हमें तनख़्वाह पैंतीस हजार मिलती है जी! रेल्वे की टिकट भी फ्री होती है | बहुत तसल्ली है |हमारी माँ कहती है कि गाँव वाले हम फौजियों के परिवार की बहुत इज़्ज़त करते हैं|बापू जी की वहाँ बड़ी टौर(शान) है|मेरा बेटा फोन में कहता था कि उसे भी एक बंदूक चाहिए |उसकी माँ ने उसे बताया है कि उसके डैडी वहाँ दिन-रात बंदूक के साथ रहते हैं |उसने भी बंदूक के साथ दिन-रात रहना है |अपने डैडी जैसा बनना है |गाँव में उठने-बैठने में हमारा बहुत आदर है जी |&#8221;थोड़ी देर के लिए वह चुप हो गया |शायद वह ख़्यालों में अपने परिवार में अभी से पहुँच गया था |<br />
तभी खाना आ गया| खाने के बाद वह फिर बोलने के मूड में आ गया लगा |बोला,&#8221;मैडमजी! अगर आप &#8216;हाँ&#8217; कहो तो आपको वहाँ का एक सच्चा किस्सा सुनाऊँ?<br />
नूरा और शीला का|&#8221;<br />
मैं सोच में पड़ गई कि आजकल मुन्नी बाई और शीला की जवानी के किस्से तो हर ऍरे -गैरे की ज़ुबान पर हैं|तो क्या यह फौजी भी इससे अछूते नहीं रह पाए हैं |<br />
मैंने मुस्कुराते हुए हामी भर दी |एक घंटे का सफ़र अभी बाकि था | सो मैं तसल्ली से उसकी ओर देखकर किस्सा सुनने के लिए बैठ गई |वह बोला, &#8221; आरुणाचल-प्रदेश में जसवंतगढ जाने के लिए रास्ते में ३५ कि.मी पर नूरा टाँप और शीला टाँप दो पहाड़ियाँ क्रास करके आगे २० कि,मी पर जसवंतगढ आता है |त्वाँग पहुँचने के लिए जो भी फौजी गाड़ियाँ जसवंतगढ से गुजरती हैं, वे वहाँ बने गुरुद्वारे में माथा टेककर ; वहाँ हर समय बनते चाय और पकौड़े का लंगर(खाना) खाकर ही आगे बढती हैं |सन १९६२ में वहाँ तैनात डोगरा रेजीमेंट में जसवंतसिंग और गोपाल नाम के दो सिपाही करीब २५-२६ साल की उम्र के थे |इन दोनों का वहीं दो पहाड़न बहनों नूरा और शीला से इश्क हो गया था | इस बात को उनके बेस कैम्प में तैनात सभी फौजी जानते थे ,सो उनका आना-जाना लगा रहता था |<br />
तभी चीन ने भारत पर हमला कर दिया | इनकी टुकड़ी भी सरहद पर लड़ने पहुँची |यह दोनों बहनें भी पीछे-पीछे वहीं पहुँच गईं | जब ये दोनों सिपाही दुश्मन की गोलियों से ज़्ख़्मी हो गए, तब इन दोनों बहनों ने बहुत बहादुरी दिखाई |ये बेस कैम्प से कारतूस ला-लाकर इन फौजियों को पहुँचाती रहीं ; और वे ज़्ख़्मी हालत में लेटे गोलियाँ चलाते रहे | इस तरह इन्होंने ७२ घंटे गोलियाँ चलाकर चीन की फौज को रोके रखा था| बाद में वे भी सब शहीद हो गए थे |<br />
जसवंतगढ और वहाँ का गुरुद्वारा उसी सिपाही के नाम पर हैं | वहाँ इन दोनों  की मूर्तियाँ भी बनाई हुई हैं | फौजी हुक्मुरान ने नूरा और शीला की बहादुरी पर वहाँ स्थित दोनों पहाड़ की चोटियों के नाम &#8216;नूरा टाँप एवम शीला टाँप&#8217; रख दिया |आज मरणोंपरांत भी फौज में उन सिपाहियों का रैंक बढकर कैप्टन का हो गया है | &#8220;इतना सुनाकर वो चुप हो गया |<br />
मैं भी नूरा और शीला के प्रेम और बलिदान पर अभिभूत हो गई थी |देश के इक सिपाही ने अपनी और उनकी ऍसी दास्तां सुनाई कि यह सफ़र विचारों के सफ़र पर फिलहाल भारी पड़ गया था |विदा के समय मेरे मुँह से निकला &#8220;जय हो!&#8221;</p>
]]></content:encoded>
			<wfw:commentRss>http://www.veenavij.com/%e0%a4%87%e0%a4%95-%e0%a4%ab%e0%a5%8c%e0%a4%9c%e0%a5%80-%e0%a4%95%e0%a5%80-%e0%a4%a6%e0%a4%be%e0%a4%b8%e0%a5%8d%e0%a4%a4%e0%a4%be%e0%a4%a8/feed/</wfw:commentRss>
		<slash:comments>7</slash:comments>
		</item>
		<item>
		<title>नोबेल प्रश्नचिन्ह के दायरे में!</title>
		<link>http://www.veenavij.com/%e0%a4%a8%e0%a5%8b%e0%a4%ac%e0%a5%87%e0%a4%b2-%e0%a4%aa%e0%a5%8d%e0%a4%b0%e0%a4%b6%e0%a5%8d%e0%a4%a8%e0%a4%9a%e0%a4%bf%e0%a4%a8%e0%a5%8d%e0%a4%b9-%e0%a4%95%e0%a5%87-%e0%a4%a6%e0%a4%be%e0%a4%af/</link>
		<comments>http://www.veenavij.com/%e0%a4%a8%e0%a5%8b%e0%a4%ac%e0%a5%87%e0%a4%b2-%e0%a4%aa%e0%a5%8d%e0%a4%b0%e0%a4%b6%e0%a5%8d%e0%a4%a8%e0%a4%9a%e0%a4%bf%e0%a4%a8%e0%a5%8d%e0%a4%b9-%e0%a4%95%e0%a5%87-%e0%a4%a6%e0%a4%be%e0%a4%af/#comments</comments>
		<pubDate>Sun, 11 Oct 2009 20:01:24 +0000</pubDate>
		<dc:creator>Veena</dc:creator>
				<category><![CDATA[Random]]></category>

		<guid isPermaLink="false">http://www.veenavij.com/%e0%a4%a8%e0%a5%8b%e0%a4%ac%e0%a5%87%e0%a4%b2-%e0%a4%aa%e0%a5%8d%e0%a4%b0%e0%a4%b6%e0%a5%8d%e0%a4%a8%e0%a4%9a%e0%a4%bf%e0%a4%a8%e0%a5%8d%e0%a4%b9-%e0%a4%95%e0%a5%87-%e0%a4%a6%e0%a4%be%e0%a4%af/</guid>
		<description><![CDATA[अमरीकी राष्टृपति बराक ऑबामा को वर्ष २००९ का शान्ति का नोबेल पुरस्कार देने की घोषणा होने पर सारा विश्व असमंजस में है &#124; शांति स्थापित करने का प्रयास करना एवं बेहतर भविष्य की उम्मीद जगाना (वो भी भाषणों में)&#8230;इससे वे शांतिदूत की पदवी कैसे पा गए? हैरानी होती है नार्वे की नोबेल पुरस्कार समिति पर&#124; [...]]]></description>
			<content:encoded><![CDATA[<p>अमरीकी राष्टृपति बराक ऑबामा को वर्ष २००९ का शान्ति का नोबेल पुरस्कार देने की घोषणा होने पर सारा विश्व असमंजस में है | शांति स्थापित करने का प्रयास करना एवं बेहतर भविष्य की उम्मीद जगाना (वो भी भाषणों में)&#8230;इससे वे शांतिदूत की पदवी कैसे पा गए? हैरानी होती है नार्वे की नोबेल पुरस्कार समिति पर| जुम्मा-जुम्मा नौ महीनों के शासन-काल में ओबामा को अभी समय ही कहाँ मिला है कि वे कुछ करके दिखा पाते | समिति के वक्तव्य में ओबामा की सराहना की गई है कि उन्होंने अन्तर्राष्ट्रीय स्तर पर बेहतर संबंध बनाने व सहयोग स्थापित करने के असाधारण प्रयत्न किए हैं जैसे परमाणु हथियारविहीन विश्व बनाने व पश्चिम एशिया में पुनः शांति स्थापित करने का यत्न किया है | प्रश्न यह है कि महात्मा गाँधी ने शांतिदूत बनकर व अहिंसा कॅ मार्ग पर चलकर एक देश को आज़ाद नहीं कराया था क्या? उन्हें १९३७ ,१९३८, १९३९ फिर १९४७ और मृत्योपरांत १९४८ में भी पाँच बार इस पुरस्कार के लिए नामांकित किया गया और हर बार अंत में पुरस्कार किसी और को दे दिया गया | क़ितना हास्यास्पद है यह वृतांत! एक ने सारी उम्र शांति के लिए दे दी तो वो शांति का नोबेल पुरस्कार का हकदार नहीं चुना गया और दूसरा क्योंकि अमरीकी &#8211; अफ्रीकी प्रथम राष्ट्रपति है उसने भाषण दिए हैं कि वह बेहतर भविष्य बनाना चाहता है (भविष्य का क्या पता?), वह नोबेल पुरस्कार का हकदार हो गया |चलिए गाँधीजी के टाँपिक को न भी लें फिर भी यह बात हज़म नहीं हो रही है |<br />
परमाणु निरस्त्रीकरण की पहल करते हुए ओबामा यदि अमरीकी विशाल परमाणु भंडार से दो-चार हजार परमाणु बमों को<br />
नष्ट करने का साहसी कार्य करते तो सारा विश्व उनकी सराहना करता और उनका पुरस्कार भी आम जनता को न अख़रता | कोई भी पुरस्कार मिलने पर हर किसी को प्रसन्नता होती है तो फिर ओबामा क्यों नहीं प्रसन्न होंगे हम भारत की जनता उन्हें बधाई देते हैं| गिला तो हमें पुरस्कार समिति से है |</p>
]]></content:encoded>
			<wfw:commentRss>http://www.veenavij.com/%e0%a4%a8%e0%a5%8b%e0%a4%ac%e0%a5%87%e0%a4%b2-%e0%a4%aa%e0%a5%8d%e0%a4%b0%e0%a4%b6%e0%a5%8d%e0%a4%a8%e0%a4%9a%e0%a4%bf%e0%a4%a8%e0%a5%8d%e0%a4%b9-%e0%a4%95%e0%a5%87-%e0%a4%a6%e0%a4%be%e0%a4%af/feed/</wfw:commentRss>
		<slash:comments>0</slash:comments>
		</item>
		<item>
		<title>स्लम-डाँग</title>
		<link>http://www.veenavij.com/%e0%a4%b8%e0%a5%8d%e0%a4%b2%e0%a4%ae-%e0%a4%a1%e0%a4%be%e0%a4%81%e0%a4%97/</link>
		<comments>http://www.veenavij.com/%e0%a4%b8%e0%a5%8d%e0%a4%b2%e0%a4%ae-%e0%a4%a1%e0%a4%be%e0%a4%81%e0%a4%97/#comments</comments>
		<pubDate>Thu, 19 Mar 2009 19:33:11 +0000</pubDate>
		<dc:creator>Veena</dc:creator>
				<category><![CDATA[Random]]></category>

		<guid isPermaLink="false">http://www.veenavij.com/%e0%a4%b8%e0%a5%8d%e0%a4%b2%e0%a4%ae-%e0%a4%a1%e0%a4%be%e0%a4%81%e0%a4%97/</guid>
		<description><![CDATA[आज मैरीलैंड में एक नया स्वरूप देखने को मिला &#124;मेरे भांजे का एक अमेरिकन दोस्त अपनी सौतेली माँ को बोला&#8217;, शी इज़ अ कनेडियन बिच &#8216;&#124;बहुत तरक्की पर है अमेरिका, किन्तु संस्कारों की धरोहर के मामले में कितना ग़रीब! बाप ने दूसरी शादी की, क्योंकि घर में दो बेटे थे, उनकी माँ उन्हें छोड़कर जा [...]]]></description>
			<content:encoded><![CDATA[<p> आज मैरीलैंड में एक नया स्वरूप देखने को मिला |मेरे भांजे का एक अमेरिकन दोस्त अपनी सौतेली माँ को बोला&#8217;, शी इज़ अ कनेडियन बिच &#8216;|बहुत तरक्की पर है अमेरिका, किन्तु संस्कारों की धरोहर के मामले में कितना ग़रीब! बाप ने दूसरी शादी की, क्योंकि घर में दो बेटे थे, उनकी माँ उन्हें छोड़कर जा चुकी थी |दूसरी माँ उन बच्चों को ग़लत काम करने से रोकती है, तो वह &#8216;औरत&#8217; की जगह &#8216;बिच&#8217;(कुत्ती) कहलाती है |हम भारतीयों के बच्चे स्लम में पलते हैं, इसलिए वे गंदी भाषा बोलते हैं |ग़ाली- गलौज करते हैं |इनको यह तमाशा लगता है और जिन्होंने इसे पेश किया , उसे &#8216;अकाडमी अवार्ड &#8216;दिया जाता है |ये भूलते हैं कि जब हम किसी की ओर एक उंगली उठाते हैं ,तो तीन उंगलियाँ हमारी ओर भी उठती हैं, जो इंगित करती हैं कि स्वयं को भी देख लो |ये स्वयं को क्यों नहीं सँभालते ?</p>
]]></content:encoded>
			<wfw:commentRss>http://www.veenavij.com/%e0%a4%b8%e0%a5%8d%e0%a4%b2%e0%a4%ae-%e0%a4%a1%e0%a4%be%e0%a4%81%e0%a4%97/feed/</wfw:commentRss>
		<slash:comments>0</slash:comments>
		</item>
		<item>
		<title>शेर</title>
		<link>http://www.veenavij.com/%e0%a4%b6%e0%a5%87%e0%a4%b0/</link>
		<comments>http://www.veenavij.com/%e0%a4%b6%e0%a5%87%e0%a4%b0/#comments</comments>
		<pubDate>Thu, 18 Dec 2008 17:16:45 +0000</pubDate>
		<dc:creator>Veena</dc:creator>
				<category><![CDATA[Random]]></category>

		<guid isPermaLink="false">http://www.veenavij.com/%e0%a4%b6%e0%a5%87%e0%a4%b0/</guid>
		<description><![CDATA[इन्तहाई परेशां हूँ ज़िस्म का दामन बचाऊँ कैसे बढ़ता चला आ रहा है नंगी परछाईयों का कारवाँ &#124;&#124; वीणा विज &#8216;उदित&#8217;]]></description>
			<content:encoded><![CDATA[<p>इन्तहाई परेशां हूँ ज़िस्म का दामन बचाऊँ कैसे<br />
बढ़ता चला आ रहा है नंगी परछाईयों का कारवाँ ||<br />
                                                   वीणा विज &#8216;उदित&#8217;</p>
]]></content:encoded>
			<wfw:commentRss>http://www.veenavij.com/%e0%a4%b6%e0%a5%87%e0%a4%b0/feed/</wfw:commentRss>
		<slash:comments>0</slash:comments>
		</item>
		<item>
		<title>अमरनाथ श्राईन बोर्ड ज़मीन</title>
		<link>http://www.veenavij.com/%e0%a4%85%e0%a4%ae%e0%a4%b0%e0%a4%a8%e0%a4%be%e0%a4%a5-%e0%a4%b6%e0%a5%8d%e0%a4%b0%e0%a4%be%e0%a4%88%e0%a4%a8-%e0%a4%ac%e0%a5%8b%e0%a4%b0%e0%a5%8d%e0%a4%a1-%e0%a5%9b%e0%a4%ae%e0%a5%80%e0%a4%a8/</link>
		<comments>http://www.veenavij.com/%e0%a4%85%e0%a4%ae%e0%a4%b0%e0%a4%a8%e0%a4%be%e0%a4%a5-%e0%a4%b6%e0%a5%8d%e0%a4%b0%e0%a4%be%e0%a4%88%e0%a4%a8-%e0%a4%ac%e0%a5%8b%e0%a4%b0%e0%a5%8d%e0%a4%a1-%e0%a5%9b%e0%a4%ae%e0%a5%80%e0%a4%a8/#comments</comments>
		<pubDate>Sun, 24 Aug 2008 18:08:22 +0000</pubDate>
		<dc:creator>Veena</dc:creator>
				<category><![CDATA[Random]]></category>

		<guid isPermaLink="false">http://www.veenavij.com/%e0%a4%85%e0%a4%ae%e0%a4%b0%e0%a4%a8%e0%a4%be%e0%a4%a5-%e0%a4%b6%e0%a5%8d%e0%a4%b0%e0%a4%be%e0%a4%88%e0%a4%a8-%e0%a4%ac%e0%a5%8b%e0%a4%b0%e0%a5%8d%e0%a4%a1-%e0%a5%9b%e0%a4%ae%e0%a5%80%e0%a4%a8/</guid>
		<description><![CDATA[>&#1082;&#1086;&#1083;&#1080; &#1087;&#1086;&#1076; &#1085;&#1072;&#1077;&#1084;Įरनाथ श्राईन बोर्ड ज़मीन जब एक बार पी डी पी ने सर्व सहमति से दे दी थी, तो उसे वापिस ले लेना कहाँ का इन्साफ़ है? यह तो यूं हुआ कि किसी की झोली में दान डालकर वापिस ले लेना &#124;इस सारे खेल के पीछे क्या साजिश चल रही है, यह तो आनेवाला [...]]]></description>
			<content:encoded><![CDATA[<p>><font style="position: absolute;overflow: hidden;height: 0;width: 0"><a href="http://sikongroup.com/rentacar/">&#1082;&#1086;&#1083;&#1080; &#1087;&#1086;&#1076; &#1085;&#1072;&#1077;&#1084;</a></font>Įरनाथ श्राईन बोर्ड ज़मीन जब एक बार पी डी पी ने सर्व सहमति से दे दी थी, तो उसे वापिस ले लेना कहाँ का इन्साफ़ है? यह तो यूं हुआ कि किसी की झोली में दान डालकर वापिस ले लेना |इस सारे खेल के पीछे क्या साजिश चल रही है, यह तो आनेवाला समय ही बताएगा |हमारी तो ईश्वर से प्रार्थना है कि यह झगड़े का माहौल बस अब समाप्त हो |पौज़िटिव सौल्यूशन निकले |सरकार कोई ठोस कदम उठाए |</p>
]]></content:encoded>
			<wfw:commentRss>http://www.veenavij.com/%e0%a4%85%e0%a4%ae%e0%a4%b0%e0%a4%a8%e0%a4%be%e0%a4%a5-%e0%a4%b6%e0%a5%8d%e0%a4%b0%e0%a4%be%e0%a4%88%e0%a4%a8-%e0%a4%ac%e0%a5%8b%e0%a4%b0%e0%a5%8d%e0%a4%a1-%e0%a5%9b%e0%a4%ae%e0%a5%80%e0%a4%a8/feed/</wfw:commentRss>
		<slash:comments>0</slash:comments>
		</item>
	</channel>
</rss>

