Archive for the ‘Random’ Category

Films n’Radio Programmes I did

Friday, July 29th, 2011

कुछ फिल्मों में काम किया था | दबाव था कि ,आप मुम्बई में रहें , यह संभव नहीं था, क्योंकि मेरी प्राथमिकता मेरा परिवार था |खैर, ८० के दशक में शायद १९८८ में मैंने पहली फिल्म की |- १–सन्-१९८८–पंजाबी फिल्म–”पुर्जा-पुर्जा कट मरे” ड़ायरेक्टर-सुरेन्दर साहनी , मेन कास्ट-गुग्गू गिल और उपासना सिंग, शूटिंग –काहलों गाँव में [...]

List of my stage-plays:-

Monday, July 25th, 2011

स्कूल में नर्सरी-क्लास से ही मैं स्टेज़ पर शो करती थी |अतीत धुँधला सा गया है, कुछ अधिक याद नहीं आ रहा |हाँ, १–सन -१९५७ में हिन्दी नाटक , “नूरजहाँ” में नूरजहाँ के रोल के लिए मुझे बैस्ट एक्टिंग का अवार्ड़ मिला था | २–सन्-१९५८-में हिन्दी नाटक , “भिक्षुणी”-के लिए फिर बैस्ट एक्टिंग का अवार्ड़ [...]

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Saturday, July 23rd, 2011

48—-Hindi Play”Tootan”Part –1 In September–1994-near Jalandhar By Mr. Mumtaz Beg. 49—Hindi play “Tootan” -part 2 In Sep–1994–By same Director 50—Punjabi Play , “Udeekaan”-Part-1 In–1994–in a village near Kapurthala–By -Baldev Salhotra 51—Punjabi Play- , “Udeekaan”-Part 2 In –1994 , By Baldev Salhotra 52—”-Viraasat” -tele-film in Punjabi My Best ever mother’s role , shoot at village “Varyaana” [...]

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Thursday, July 21st, 2011

The list of my T.V shows, The films I acted in, the radio – programmes I did, the stage -shows I performed, the achievements I was recognised for.

हजारे के हाथ ,हम हैं साथ्!

Thursday, April 7th, 2011

समाज-सेवी अन्ना हजारे ने जो मुहिम छेड़ा है ,वह हम और आप सब के मन की आवाज़ है|भ्रष्टाचार के ख़िलाफ हम भी आवाज़ उठाना चाहते हैं| आज से नहीं सालों से|लेकिन चुपचाप घर में बैठ जाते हैं , रोकर या कुढ-कुढ़कर बस अपने चार पहचान के लोगों से बातें करके मन की भड़ास निकाल लेते [...]

इक फौजी की दास्तान

Thursday, March 24th, 2011

a story about the life and experiences of an army man on the border area.

नोबेल प्रश्नचिन्ह के दायरे में!

Sunday, October 11th, 2009

अमरीकी राष्टृपति बराक ऑबामा को वर्ष २००९ का शान्ति का नोबेल पुरस्कार देने की घोषणा होने पर सारा विश्व असमंजस में है | शांति स्थापित करने का प्रयास करना एवं बेहतर भविष्य की उम्मीद जगाना (वो भी भाषणों में)…इससे वे शांतिदूत की पदवी कैसे पा गए? हैरानी होती है नार्वे की नोबेल पुरस्कार समिति पर| [...]

स्लम-डाँग

Thursday, March 19th, 2009

आज मैरीलैंड में एक नया स्वरूप देखने को मिला |मेरे भांजे का एक अमेरिकन दोस्त अपनी सौतेली माँ को बोला’, शी इज़ अ कनेडियन बिच ‘|बहुत तरक्की पर है अमेरिका, किन्तु संस्कारों की धरोहर के मामले में कितना ग़रीब! बाप ने दूसरी शादी की, क्योंकि घर में दो बेटे थे, उनकी माँ उन्हें छोड़कर जा [...]

शेर

Thursday, December 18th, 2008

इन्तहाई परेशां हूँ ज़िस्म का दामन बचाऊँ कैसे बढ़ता चला आ रहा है नंगी परछाईयों का कारवाँ || वीणा विज ‘उदित’

अमरनाथ श्राईन बोर्ड ज़मीन

Sunday, August 24th, 2008

>коли под наемĮरनाथ श्राईन बोर्ड ज़मीन जब एक बार पी डी पी ने सर्व सहमति से दे दी थी, तो उसे वापिस ले लेना कहाँ का इन्साफ़ है? यह तो यूं हुआ कि किसी की झोली में दान डालकर वापिस ले लेना |इस सारे खेल के पीछे क्या साजिश चल रही है, यह तो आनेवाला [...]