तुरपाई
Sunday, October 9th, 2011A woman tortured by the so called relationship.Shes been raped by her own family.She cries n asks for mending of a torn heart.
A woman tortured by the so called relationship.Shes been raped by her own family.She cries n asks for mending of a torn heart.
Inquisitiveness is a natural instinct, but it troubles a lot to a kid. They can not digest the changes in daily life.When adolesence knocks to their door step they just astonished.
A wife is never complete if her husband does not understand her fully.She wants a special place in his life to be adored.
иконографияज्यूं -ज्यूं इम्तिहान खत्म हो रहे थे,, कैली का मन अजीब ऊहापोह से घिर रहा था |अब आगे क्या है? ग्रेजुएशन तक बचपन व जवानी का एक अहम हिस्सा सीधी लकीर पर चल रहा होता है |कब बचपन ने मुँह मोड़ा ,कब जवानी ने आकर गलबैयाँ डाल लीं, पता ही नहीं चलता है |लेकिन अब [...]
Never carry the ideas n thoughts of young age.It changes with the time.Face the reality, and accept it.Then be happy.
हे क्षीर-स्त्रोत्री ! तुम ही गुरु सखा मेरी अन्तर्प्रज्ञा हो माँ ! जब नन्हे से दो होंठ जुड़े फूटा अस्फुट प्रथम स्वर मां ! बाल-कलोल नटखट बाल-हठ पर लाड़ से लिपटाया तुमने माँ ! चेहरा पढ मन जाना कामधेनु सी इच्छाएं की पूर्ण तुमने माँ ! तन के फटने मन के टूटने पर तुरपाई कर [...]
रेशु को आज पल भर की भी फुर्सत नहीं थी|सजे हुए घर को नए सिरे से सजाए जा रही थी |घर पुराना ही सही लेकिन काफ़ी बड़ा था|वैसे भी इसे वो इतने करीने से सजाती-सँवारती थी, कि आने वाले आगुंतक एकबारगी उसकी कलात्मक अभिरुचि और कला-प्रेम की झलक उस सजावट में देखकर उसकी भूरी-भूरी प्रशँसा [...]
शिव शंकर , भोले-भन्डारी, कैलाशपति, विश्वनाथ ब्रम्हाण्ड के कण-कण में व्याप्त इस जगत को जागृत करने हेतु विभिन्न स्थानों पर भिन्न- भिन्न रूपों में पूजे जाते हैं|उन सब में सर्वोपरि कश्मीर में स्थित अमरनाथ धाम है |उत्त्त्तर भारत में कश्मीर की बर्फीली पहाड़ियों में श्री अमरनाथ बर्फानी शिवलिंग के रूप में प्रगट होते हैं |शिव [...]
विशा फटी आँखों से रोहण को तक रही थी |किसी तरह अपने को सँभाल वह उसका हाथ झटक कर वहाँ से हट गई |आँखों में अटके सागर को उसने बेरोक बह जाने दिया |भरे-पूरे घर में तो उसे सिसकी लेने पर भी रोक थी ,अभी तक जो बात पर्दे में थी वह खुल सकती थी [...]
दिन भर फुर्सत में बैठे रहने से विशा का मन नहीं लगता था |नौकर-चाकर ही सब काम कर दिया करते थे |उसने पेंट करके ग्रीटिंग-कार्ड़ बनाने की सोची |विशा का हाथ ड़्राईंग-पेन्टिंग में बहुत माहिर था |उसने बहुत ही प्यारे-प्यारे कार्ड़स बनाए |इससे उसका समय रचनात्मक-कार्यो में बीतने लगा, साथ ही घर में बड़े-बूढ़े,व बच्चे [...]