Archive for the ‘Hindi Short Stories’ Category

Hinduism Needs Some Changes

Tuesday, March 9th, 2010

Hindu Religion- A Way of Life That Needs Some Changes.
I am not any expert on religion but a common Hindu who thinks for himself. The views presented here are solely for intelligent discussion and not as an argument or any form of debate. The readers are free to make their own conclusions dispassionately after reading [...]

पुनर्जीवन (second Part)

Thursday, May 21st, 2009

विशा फटी आँखों से रोहण को तक रही थी |किसी तरह अपने को सँभाल वह उसका हाथ झटक कर वहाँ से हट गई |आँखों में अटके सागर को उसने बेरोक बह जाने दिया |भरे-पूरे घर में तो उसे सिसकी लेने पर भी रोक थी ,अभी तक जो बात पर्दे में थी वह खुल सकती थी [...]

पुनर्जीवन(First Part)

Thursday, May 21st, 2009

दिन भर फुर्सत में बैठे रहने से विशा का मन नहीं लगता था |नौकर-चाकर ही सब काम कर दिया करते थे |उसने पेंट करके ग्रीटिंग-कार्ड़ बनाने की सोची |विशा का हाथ ड़्राईंग-पेन्टिंग में बहुत माहिर था |उसने बहुत ही प्यारे-प्यारे कार्ड़स बनाए |इससे उसका समय रचनात्मक-कार्यो में बीतने लगा, साथ ही घर में बड़े-बूढ़े,व बच्चे [...]

इन्द्रधनुषी चाह

Thursday, May 21st, 2009

विजय की कार जैसे ही कंवल की दुकान के सामने जाकर रुकी |कंवल ग्राहक को फ़टाफट सामान पकड़ाकर बाहर की ओर भागा |उसने विजय को कसकर सीने से लगा लिया |दोनों में बेहद प्यार था |रामनाथ को दुकान देखने को कहकर, दोनो दोस्त दुकान के ऊपर के घर में चले गए |
सामने ही ऊँचे कद [...]