Archive for the ‘Hindi Short Stories’ Category

कदमों की थाप

Sunday, August 10th, 2008

जीने पर चढ्ते भारी भरकम जूतों के कदमों की थाप सुनते ही कढ़ाई में चलती मेरे हाथ की कड़छुली वहीं रुक गई |मैं अपने ध्यान में काम में मस्त थी, किन्तु अब आगुन्तक को देखने को आँखें दरवाज़े की ओर लग गईं |जूतों की थाप बता रही थी कि कोई बहुत थका है या सोच […]

गज़ल

Wednesday, July 23rd, 2008

मेरी साँसों में घुली
यह खुशबुएं
गवाह हैं, उन पलों की
जब हम कदम
हुए थे वे मेरे….
पशेमां हूं यारा
क्यूं इस कदर
बदज़न हो गए वो
बेरुखी छलकती है
करीब आते हैं जब वे मेरे….
ज़िदंगी इक शमा बन गई है
इंतज़ारे शमा
जलेगी तब तक
जब तक हमदम न होंगे वे मेरे….
वीना विज ‘उदित’

सम्मोहन

Thursday, March 13th, 2008

सन अस्सी की बात है| अमेरिका से पीटर, उसकी पत्नी कैरोलीना एवम क्रमशः बारह और दस वर्ष की आयु के उनके दो पुत्र जैक व जैरी कश्मीर आए थे | श्री नगर हवाई अडडे पर पहुँचते ही कश्मीर की ठंडी हवाओं ने उनके तन का स्पर्श किया, तो दिल्ली के तपते जून की तपिश का […]

लौ का इंतज़ार

Sunday, November 11th, 2007

बढते आते अँधेरे
गलबय्यां डाल
मेरे अस्तित्व को नकारते
मुझ पर छाते चले गए |
हमराही कहीं था
टटोलने में दिशाभ्रम
उसे भी छिटका गया |
भयावह कालिमा
और यह बाँझ आकाश
समाधिस्थ लगता
सप्तऋषियों का कारवाँ |
अन्तस की लपटों की लौ
बुझकर मृतप्रायः हो
चीत्कार करने को आतुर
खुले होठों में
दंतशिला बन ठिठक गई |
और………….
भटकन को जो दे सके
इक सही मार्ग-दर्शन–
थरथराता, काँपता बदन
वीरानों में करता
उस […]