Archive for the ‘Hindi Poetry’ Category

भोर का तारा

Thursday, October 13th, 2011

художници на икониकोई कलरिंग -किताब नहीं है बाल-मन जिसमें भर देंगे आप अपने मनचाहे रंग | उसके अन्तस से प्रस्फुटित होंगे रंग-बिरंगे सतरंगी नवरंगी ढेरों रंग | बहने दो ना रंगों की सरिता में उसे उभरने दो ना उसकी आत्मा में चाहत के रंग | बाल-सुलभ उड़ान को भर लेने दो बाँहों में आसमान फिर [...]

चूड़ियों की प्यास

Thursday, October 13th, 2011

The glass- bangles wanted to be adored but someone broken them with crueality.A vendor put the broken ones in his cladioscope and pleased the kids with the show.The broken -bangles now contented to pleased the lill kids.

देश की क्यारी

Monday, August 15th, 2011

свети минаПравославни икониचमन की बेतरतीब लुभावनी क्यारी दामन थामे बहार का खिलखिलाती ढेरों रंग-बिरंगे फूल इक साथ उगाती लगे, बागबान की मूढ़ बुद्धि दर्शाती नया जमाना, हर रंग चाहे अपनी क्यारी अस्तित्व की होड़ में टहनियाँ भिड़ जातीं अखंड़ भारत के गुल्शन में रहें सब साथ जात-पाँत की व्याधि ग़ार में ड़ुबाती छोटे-बड़े, अमीर-ग़रीब का [...]

वक्त की बरबादियाँ-ग़ज़लl

Wednesday, August 3rd, 2011

Its about WAQT or TIME,how it ruined me just because of your betrayal.

पंजाबी —जुर्रत!

Saturday, May 14th, 2011

The wandering souls and the dark nights are always together.Without body the soul n without moon the nights are incomplete.They boldly dare to become sisters with the same type of grief n lackness.

मेरी चुनिंदा पंजाबी कविताएं—-चरीटां दी चीख़

Saturday, May 14th, 2011

When the Heart is tortured , the unvisible pains are felt throughout the body.

ग़ज़ल-मौत भी शायराना चाहता हूँ !

Sunday, May 8th, 2011

फ़िदा हुस्नो-जमाल पर तेरे ऍ मेहज़बीं दीदारे-हुस्न से सकूने-दिल चाहता हूँ.. भटकता कूए-यार में फिरूँ इश्को-सितम उठाना चाहता हूँ.. रफ्ता-रफ्ता चल पड़े हैं, सहरे-आगोश में रस्मे-वफ़ा आजमाना चाहता हूँ.. दीवानग़ी में डूबकर मुर्शिद मेरे दस्तूरे-वफ़ा निभाना चाहता हूँ.. तेरी रुसवाई की ख़लिश है सीने में ख़लिश मरकर मिटाना चाहता हूँ.. सामने बैठो सरे-बज़्म ,तकते रहो [...]

माँ

Saturday, April 23rd, 2011

हे क्षीर-स्त्रोत्री ! तुम ही गुरु सखा मेरी अन्तर्प्रज्ञा हो माँ ! जब नन्हे से दो होंठ जुड़े फूटा अस्फुट प्रथम स्वर मां ! बाल-कलोल नटखट बाल-हठ पर लाड़ से लिपटाया तुमने माँ ! चेहरा पढ मन जाना कामधेनु सी इच्छाएं की पूर्ण तुमने माँ ! तन के फटने मन के टूटने पर तुरपाई कर [...]

इक आलिंगन !

Tuesday, January 11th, 2011

चाँद की चाँदनी से छिपकर श्यामल मेघों की ओट में आओ, मिलन की चाह में चुपके से , ले लें इक आलिंगन ! सूर्यकिरणें आती छनछन गरमातीं पत्तोँ के तन आओ, सुबह की ओस बनकर पत्तों पर लुढ्क,ले लें इक आलिंगन ! साँय-साँय हवा के शोर से लरजतीं पेड़ों की डालियाँ आओ, पत्ते बन डाली [...]

स्वागतम युवराज

Tuesday, November 16th, 2010

झरे फूल हर-सिंगार के बगिया ने ओढ़ ली चुनरिया आवतरित हुआ युवराज महक उठा घर-प्रांगण | नव-शिशु रुदन गूँजा भ्रमित भँवरा गुँजन भूला हर्षित हो चिड़ियाँ लगीं चहकने जुगनु जगमग लगे चमकने | पुरखों की परम्परा निभाना भाई बहनों का देना साथ सर्वदा जग में महके यूँ नाम तुम्हारा ज्यूँ ईशान में चमके ध्रुवतारा| आशीष [...]