Archive for August, 2017

बिकाऊ कोख (लघु कथा)

Thursday, August 17th, 2017

मुम्बई के मलाड की ओर मालावाड में झुग्गी, झोपड़ी मे रहने वाले गरीबों की बस्तियाँ बहुत हैं | जहाँ औरत की अस्मत के सौदों के अलावा राजनीति भी बिकाऊ है…और अब तो अजीबो-ग़रीब सौदे होते हैं | जी हाँ , पेट की क्षुधा बुझाने की खातिर! घर के मर्द घर से सुबह-सवेरे निकल जाते हैं […]

संस्मरण—बटकुट की वादियाँ

Wednesday, August 2nd, 2017

A three weeks visit to the valley of Batkut in Kashmir.Its natural beauty ‘s description and about the life of Nomades -how the auther had experienced it.