Archive for February, 2015

अपने अपने शून्य

Friday, February 27th, 2015

http://www.veenavij.com/ अपने अपने शून्य अपने अपने शून्य स्वयं में समेटते अतीत के द्वार धकेल बढ़ते जाते छद्म चेहरों में अंत: छिपा विचरते उत्तरोत्तर बढ़ती परछाइयों से डरते । अन्धकार को बींध पार ताकते स्मित -पुष्प लता खिली देख हर्षते धवल चंद्र-रात्रि में अभिसार करने पुष्प लताओं.को बीनने स्वप्न निकलते । मन: प्राण पर जमी काई […]

इसलिए आओ हृदय में ।

Monday, February 16th, 2015

लोभ, मोह, माया से लालित क्षुद्र सीमाएं वक्र रेखा में होती उद्भासित निरन्तर शिथिल हो रही अंगयष्टि है बेचैन हे वरद हस्त कौशल -शिल्पी! शरण धरो । हृदय के अतल गह्वर का आत्मज्ञान विलीन हो अवरोधित हुआ निराधार कौसुम्भी धाराएं जो करतीं चलायमान , अवरोध हटा उनका मार्ग सरल करो । * अनुतापवश कांपते अधरों […]