Archive for March, 2008
एक यत्न
Tuesday, March 4th, 2008नित्य होता शब्दों का नृत्य
ख़बरें उड़तीं, चर्चे होते
मीडिया बेलगाम जपता
आदम हव्वा के किस्से
भौतिकता साँस लेती
संवेदना लुप्त होती जाती
शब्द शक्तिहीन
सियाह कालिमा केवल
चेहरे पर नाक नहीं
हाथों में कलम छोटी हो गई
अक्षरों का कद
आदमकद से ऊपर उठ गया
दिमागों की बत्ती गुल है
लावारिस अक्षर
सड़क किनारे लगे
लैम्पपोस्ट से ऊर्ज़ा माँगकर
जन्म दे रहे हैं
इक रूहानी इबारत को
लो,
बोलने लगे हैं अक्षर
हवाओं में […]
बसंत झुलना झुलाए
Saturday, March 1st, 2008तंगदिल हुईं सर्द हवाएं
मौसम ने ली अँगड़ाई
इक इक क़तरा था सहमा
ज़र्रे-ज़र्रे ने तपिश पाई…
लिहाफ़ से ढ़ँकी सियाही
धवल हुई खोल किवाड़
नन्हे पैरों की पैंजनिया
छुन-छुन आँगन का सिंगार..
अब के बसंती पवन लाई
कसमसाते तन में उभार
आशिकों पे बरसाती
पलाश फूल के मेघ-मल्हार..
आए पीली सरसों से लहरा के
साजन के संदेस
बौरों से हुआ पेड़ों का श्रिंगार
कच्चे आमों के इंतज़ार.
कोयल कूक विरह […]