स्लम-डाँग

आज मैरीलैंड में एक नया स्वरूप देखने को मिला |मेरे भांजे का एक अमेरिकन दोस्त अपनी सौतेली माँ को बोला’, शी इज़ अ कनेडियन बिच ‘|बहुत तरक्की पर है अमेरिका, किन्तु संस्कारों की धरोहर के मामले में कितना ग़रीब! बाप ने दूसरी शादी की, क्योंकि घर में दो बेटे थे, उनकी माँ उन्हें छोड़कर जा चुकी थी |दूसरी माँ उन बच्चों को ग़लत काम करने से रोकती है, तो वह ‘औरत’ की जगह ‘बिच’(कुत्ती) कहलाती है |हम भारतीयों के बच्चे स्लम में पलते हैं, इसलिए वे गंदी भाषा बोलते हैं |ग़ाली- गलौज करते हैं |इनको यह तमाशा लगता है और जिन्होंने इसे पेश किया , उसे ‘अकाडमी अवार्ड ‘दिया जाता है |ये भूलते हैं कि जब हम किसी की ओर एक उंगली उठाते हैं ,तो तीन उंगलियाँ हमारी ओर भी उठती हैं, जो इंगित करती हैं कि स्वयं को भी देख लो |ये स्वयं को क्यों नहीं सँभालते ?

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