गज़ल

मेरी साँसों में घुली
यह खुशबुएं
गवाह हैं, उन पलों की
जब हम कदम
हुए थे वे मेरे….
पशेमां हूं यारा
क्यूं इस कदर
बदज़न हो गए वो
बेरुखी छलकती है
करीब आते हैं जब वे मेरे….
ज़िदंगी इक शमा बन गई है
इंतज़ारे शमा
जलेगी तब तक
जब तक हमदम न होंगे वे मेरे….

वीना विज ‘उदित’

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