स्तुतिगान हुआ तब क्षण का

रसमय काव्य निरख, बहुचर्चित गीत गुँजा
शान्त मन चंचल हो झंकृत हुआ
नवयौवन राग सुना, भँवरे ने पराग चुना
मनमीत बना प्रियतम प्रिय का
स्तुतिगान हुआ तब क्षण का||
अंतरंग मिलन मधुरिमा फैली
किरणों ने स्वर्णिम आभा हर ली
उज्जवलित बनी चादर मटमैली
अभयदान हुआ मृत्यु पल का
स्तुतिगान हुआ तब क्षण का ||
क्षणभंगुर सी आभा निखरी
मधुराग मगन पायल खनकी
पल-पल दीप -ज्योति बिखरी
कल-कल नाद हुआ पावन जल का
स्तुतिगान हुआ तब क्षण का ||

वीणा विज’उदित’
(सन्नाटों के पहरेदार से)

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