रौंग नम्बर (लघु कथा)

हैलो ! मैं मुम्बई से बोल रही हूँ |
इंटर नैट पर   PINE lODGE  का ब्लाँग देखा |पसंद आया |क्या २० जुलाई से २३ जुलाई तक की बुकिंग मिल जाएगी?
बाय द वे , आप कौन?
“मैम , मैं यहाँ का मालिक देव |आप कितने लोग हैं?”, देव ने कहा (पचपन-साठ के करीब उम्र, लेकिन देखने में कम)

“I am all alone,चलेगा न!”

भला देव को क्यूँ ऍतराज़ होगा? ग्राहक मिल रहा है | उसने कहा कि आप (नम्बर देते हुए)इस नम्बर पर कुछ एडवाँस जमा करा दीजिएगा |
इस पर वह और मधुर आवाज़ में बोली, ” देव साहब, मैं खुद आ रही हूँ न! आते ही पेमेंट कर दूँगी | प्लीज़ डोन्ट वरी |
अगले दिन,
हैलो, देव!मैं बोल रही हूँ, मुम्बई से |पहचाना?
इस पर देव ने मुस्कुराते हुए लहज़े में कहा, “श्योर! कहिए”
“असल में मैं कश्मीर घूमने आ रही हूँ | आप मुझे गाईड करेंगे न! (वो देव साहब से देव पर आ गई थी )
देव ने तपाक से उत्तर दिया,” I will be at your service madam! ”

अगले दिन,
हैलो, हैलो ! हाय देव, मैं बोल रही हूँ सुहाना | मैं कल मुम्बई से चल रही हूँ |जम्मू पहुँचकर तुम्हे contact करुंगी |फिर जैसे तुम कहोगे|
(वह ‘आप’ से ‘तुम’ पर आ गई थी)
देव को लड़की काफ़ी तेज़ लगी |लेकिन ग्राहक तो ग्राहक ही है |देव ने भी कहा, ” You are always welcome.”

“O.K. then see you.”

Im looking forward.All the best .Mam!- देव ने जवाब दिया |
२० जुलाई की सुबह–
हैलो ! हाय देव , (उत्साहित) मैं जम्मू पहुँच गई हूँ| अब टैक्सी कर लूँ क्या? By noon I will be with you .Ok see you.Bye…
देव ने झट हामी भर दी |भला उसे क्यूँ एतराज़ होगा |हाँ, उसने इतना ज़रूर कहा कि श्रीनगर की बजाय पहलगाम की टैक्सी लेना |
आधे रास्ते से फोन….
“हैलो देव मैं तुमसे एक घंटे की दूरी पर हूँ |यानि मैं खन्नाबल पहुँच गई हूँ | सी यू…”
(उसकी बेतकल्लुफी बढती ही जा रही थी ,उसकी बेताबी ने देव को परेशानी में डाल दिया था|)पता ही नहीं चला कब घंटा बीत भी गया |
तभी एक टैक्सी गेट से भीतर दाखिल हुई, तो होटल के अटैंडंट ने आगे बढकर हर कस्टमर की तरह उसे भी वैलकम किया और टैक्सी का दरवाज़ा
खोलने लगा कि तभी देव साहब भी बाहर निकल आए व मुस्कुराकर आगे बढते हुए बोले, ” वैलकम मैडम!”
दरवाज़ा न खोलते हुए वो भीतर से ही बोली, “देव कहाँ हैं?”
“मैं आपके सामने हूँ मैडम”, देव ने मुस्कुराकर कहा |
देव को ऊपर से नीचे तक देखते हुए ,उसकी उम्र का अंदाज़ा लगा –शायद उसकी उम्मीदों पर पानी फिर गया था|वो सकपकाते हुए , ठंडी
आवाज़ में बोली,” Are you the person to whom I was talking to–?Dev..??

“Yes mam”..देव ने कहा |
इस पर कार का दरवाज़ा फ्टाक से बंद कर के उसने ड्राइवर से कहा,”दूसरे होटल चलो ”
टैक्सी के गेट से बाहर निकलते ही देव आज की माँर्डन लड़कियों की फितरत पर मुस्कुरा भर दिए |जबकि सारा स्टाफ़ हैरान था |

वीणा विज ‘उदित’

 

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