मुस्कानें

कैसे लौटा दूँ इनकी मुस्कानें?
नन्हे बचपन की, सूखे अधरों की
भयभीत मुस्कानें….कैसे लौटा दूँ?
नवयौवन के उमंग मन की
आकाश को छूती,जमाने को बाहों में समेटने की
हसरतों भरी,आहत मुस्कानें….कैसे लौटा दूँ?
द्वार की ओट में ठिठकी
प्रीतम की बाट जोहती
सुबह को साँझ में लपेटती
गोरी की मुरझाई मुस्कानें….कैसे लौटा दूँ?
दीए की लौ सी पल-पल जलतीं
हर दिन मरतीं पर फिर भी
जीवन जीए जातीं
बिरहन की खोई मुस्कानें….कैसे लौटा दूँ?
भारी कदमों से राहों के पत्थर नापतीं
गाड़ी जीवन की खींचतीं
फिर भी न थकतीं
पथिक की सूखी मुस्कानें….कैसे लौटा दूँ?
ढलती उम्र में सुख-दुख की हदें नापतीं
कभी हँसतीं, कभी रोतीं
हरदम बढ़ती जातीं
नाकाम हसरतों की थकी मुस्कानें….कैसे लौटा दूँ?
लाठी टेकती, बीती यादों का बोझा ढोतीं
ग़ुरबत और बीमारी सहतीं
अँधियारे की तहें नापतीं
फीकी मुस्कानें….कैसे लौटा दूँ?
कैसे लौटा दूँ,इन सब की मुस्कानें ???

वीणा विज ‘उदित’ (सन्नाटॉं के पहरेदार से)

Be Sociable, Share!

Comments are closed.