प्रेम तुम्हारा

खिलती मुस्काने तुम से हैं,
जीवन मेरा है प्रेम तुम्हारा|
प्रातः सन्ध्या सब सिमट गए हैं,
मुँदे नयनों में बसा रूप तुम्हारा|
चातक बन स्वाति नक्षत्र निहारूँ,
चकोर बावरी चंदा को पुकारूँ|
हर पल हर क्षण मैं यही विचारूँ,
छवि तेरी निज हिय में उतारूँ|
उमंगों की दीवानगी तुम से है,
यौवन मेरा है प्रेम तुम्हारा|
साँसों की रवानगी तुम से है,
आभास मेरा है प्रेम तुम्हारा||

वीणा विज ‘उदित’
(सन्नाटों के पहरेदार -से)

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2 Responses to “प्रेम तुम्हारा”

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